एक ऐसा #सम्राट जिसके #पिता और #पुत्र दोनो महान हुऐ जब हम भारत के मौर्य वंश के सम्राटों बारे में बात करते हैं तो चंद्रगुप्त मौर्य, बिन्दुसार और सम्राट अशोक का नाम हमारे सामने सबसे पहले आता है
सम्राट अशोक पर विशेष:-
सम्राट असोक महान के दौर में भारत पर हमला करना तो छोड़ो, विदेशी राजाओं को यह डर सताए रहता था कहीं सम्राट असोक महान उनके साम्राज्य पर आक्रमण ना कर दें
सम्राट अशोक महान ने सिर्फ 84,000 स्तूप चैत्य ही नही बनाया, उन्होंने 52 ,00,000 लाख वर्ग किलोमीटर भारत का क्षेत्रफल भी बनाया जिसे अखंड भारत कहां जाता था
*छत्तीसगढ़ आजतक, कोंडागांव 12 अक्टूबर 2024*
एक ऐसा सम्राट जिसके पिता और पुत्र दोनो महान हुऐ जब हम भारत के मौर्य वंश के सम्राटों बारे में बात करते हैं तो चंद्रगुप्त मौर्य, बिन्दुसार और सम्राट अशोक का नाम हमारे सामने सबसे पहले आता है, मौर्य साम्राज्य की स्थापना का श्रेय चंद्रगुप्त मौर्य को जाता है। चंद्रगुप्त मौर्य के बेटे बिंदुसार मौर्य थे । हालांकि, जितने लोकप्रिय बिंदुसार के बेटे सम्राट अशोक हुए , बिन्दुसार खुद न हो सके। चंद्रगुप्त मौर्य के बाद बिंदुसार ने ही अपने पिता की जगह ली थी और सम्राट भी बने,यूनानी लेखकों ने उसे अमित्रोकेडीज कहा है। जिसका संस्कृत में रूपांतर अमित्रघात (शत्रुओं को नष्ट करने वाला) होता है। जैन ग्रंथ में बिंदुसार का जिक्र सिंहसेन के नाम से मिलता है।
इतिहास में बिंदुसार को ‘महान पिता का पुत्र और महान पुत्र का पिता’ भी कहा गया है। वह इसलिए कि वे अखण्ड भारत के निर्माता चंद्रगुप्त मौर्य के बेटे थे और। महान सम्राट अशोक के पिता थे •बिंदुसार ने अपने पिता द्वारा स्थापित किए गए साम्राज्य को अक्षुण्ण बनाये रखा टूटने नहीं दिया अखंड भारत को, बिन्दुसार मौर्य के शासन के दौरान तक्षशिला प्रांत में विद्रोह भड़क गया था, क्योंकि प्रांतीय अधिकारी वहा पर ज्यादा ही अत्याचार कर रहे थे। बिंदुसार का बड़ा बेटा सुशीम इसे दबाने में नाकाम रहा तो बिंदुसार ने अशोक को भेजा।
अशोक ने न केवल विद्रोह को ही दबाया, बल्कि वहां पूरी तरह से शांति भी स्थापित कर दी।
बिंदुसार के बारे में बताया जाता है कि बाहरी देशों से उन्होंने बहुत अच्छे संबंध बना रखे थे।
अच्छे संबंधों के कारण ही यूनान के राजा की ओर से राजदूत के रूप में डेइमेकस बिंदुसार के शासनकाल में उनके राज्य में थे। यही नहीं, मिस्र के राजा ने भी अपने राजदूत डायनीसियस को बिंदुसार के राज्य में भेज रखा था, ताकि दोनों देशों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध बना रहे।
बिंदुसार ने पश्चिमी देशों के साथ व्यापारिक, सामाजिक और कूटनीतिक संबंध भी कायम रखे थे। बिंदुसार ने आजीवक धर्म को अपनाया था।
वहीं, बिंदुसार के बेटे अशोक ने बौद्ध धर्म को स्वीकारा था।
पाली भाषा के ग्रंथ महा वंश के मुताबिक बिंदुसार ने 27 वर्षों तक राज किया था।
वैसे, बिंदुसार की मृत्यु 273 ईसा पूर्व में ही बताई जाती है।
जितने आक्रामक अन्य मौर्य शासक हुए, उनकी तुलना में बिंदुसार को बहुत ही कम आक्रामक देखा गया है।
तारानाथ का मानना है दक्षिण भारत पर विजय बिंदुसार ने पाई थी। उसने करीब 16 राज्यो को नष्ट करके पूर्वी और पश्चिमी समुद्रों के बीच के हिस्से पर साम्राज्य का विस्तार किया था ।राज्य विस्तार करने में सम्राट अशोक का उल्लेख कलिंग विजय मे ही मिलता है । ऐसे में इस संभावना को बल मिलता है कि दक्षिण पर विजय पाने में बिंदुसार की भूमिका थी.
सम्राट असोक महान ने सिर्फ 84,000 स्तूप चैत्य ही नही बनाया, उन्होंने 52 ,00,000 लाख वर्ग किलोमीटर भारत का क्षेत्रफल भी बनाया जिसे अखंड भारत कहां जाता था
नालंदा तक्षशिला विक्रमशिला जैसे कई विश्वविद्यालय बनावाए
थे जिससे विदेश से लोग शिक्षा ग्रहण करने भारत आते थे ।ईसा पूर्व भारत में 500 BC से बौद्ध सभ्यता थी कोई भी भारत पर आंख उठाकर देखने की हिम्मत नही करता था।
सिकंदर आया लेकिन सम्राट असोक महान के दादा जी सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य से डर कर भाग गया
सम्राट असोक महान के दौर में भारत पर हमला करना तो छोड़ो, विदेशी राजाओं को यह डर सताए रहता था कहीं सम्राट असोक महान उनके साम्राज्य पर आक्रमण ना कर दें
सेंट्रल एशिया पूरा गंधारा, अफ़ग़ानिस्तान, ईरान, नेपाल, म्यांमार, सब भारत का अभिन्न अंग थे.!
इसलिए कहा जाता है 👇
था सूर्य चमकता मौर्यो का घनघोर बदरिया डरती थी
था शेर गरजता सीमाओ पर बिजली भी आहें भरती थी।



