*गुण्डाधुर कॉलेज का बड़ा कदम: जल परीक्षण लैब से हुआ MOU*

*अब छात्र करेंगे असली लैब में काम, फ्री में होगा सैंपल टेस्ट और मिलेगा रिसर्च का प्लेटफॉर्म*
*छत्तीसगढ़ आजतक, कोंडागांव 20 अप्रैल 2026*
कोंडागांव। शासकीय गुण्डाधुर स्नातकोत्तर महाविद्यालय ने शिक्षा को व्यवहारिक और रोजगारोन्मुख बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल करते हुए जिला जल परीक्षण प्रयोगशाला, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते से अब महाविद्यालय के विद्यार्थियों को सीधे सरकारी लैब में कार्य करने, सीखने और शोध करने का अवसर मिलेगा।
इस अनुबंध पर महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सरला आत्राम एवं जिला जल परीक्षण प्रयोगशाला के कार्यपालन अभियंता श्री वीरेंद्र पांडेय ने हस्ताक्षर किए। गवाह के रूप में आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) के प्रभारी डॉ. देवाशीष हालदार तथा जिला समन्वयक श्री मिथिलेश कुमार साहू ने भी हस्ताक्षर कर इस साझेदारी को औपचारिक रूप दिया।
क्या मिलेगा छात्रों को? (MOU के मुख्य फायदे)
इस MoU के तहत विद्यार्थियों को अब सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहना पड़ेगा, बल्कि वे सीधे प्रयोगशाला में काम करेंगे—
जल गुणवत्ता परीक्षण की लाइव ट्रेनिंग – छात्र खुद सैंपल लेकर उसका परीक्षण करेंगे
आधुनिक उपकरणों पर काम करने का मौका – लैब के एडवांस इंस्ट्रूमेंट्स का सीधा अनुभव
फ्री सैंपल टेस्टिंग सुविधा – प्रोजेक्ट और रिसर्च के लिए बिना शुल्क परीक्षण
UG, PG और PhD छात्रों के लिए रिसर्च सपोर्ट – डिसर्टेशन और थीसिस में सीधी मदद
इंटर्नशिप और फील्ड एक्सपोजर – वास्तविक कार्य-परिस्थितियों में सीखने का अवसर
डेटा एनालिसिस और रिपोर्ट राइटिंग स्किल – प्रोफेशनल रिपोर्ट तैयार करना सीखेंगे
“MoU से छात्रों को मिलेगा असली सीखने का मंच” — नसीर अहमद
महाविद्यालय के रसायनशास्त्र विभाग के प्राध्यापक डॉ. नसीर अहमद ने बताया कि महाविद्यालय लगातार विभिन्न संस्थानों से MoU कर रहा है, जिससे छात्रों को सीधा लाभ मिल रहा है।
उन्होंने कहा—
“अब विद्यार्थी सिर्फ थ्योरी तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि खुद प्रयोग करेंगे, डेटा समझेंगे और प्रोफेशनल स्किल्स विकसित करेंगे। यह उनके करियर के लिए गेम-चेंजर साबित होगा।”
शिक्षा और तकनीक का मजबूत कनेक्शन
यह MoU शिक्षा और सरकारी तकनीकी संस्थान के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य करेगा। इससे न केवल विद्यार्थियों की प्रयोगात्मक दक्षता बढ़ेगी, बल्कि वे भविष्य में रोजगार और शोध के क्षेत्र में भी अधिक सक्षम बन सकेंगे।
महाविद्यालय प्रशासन ने इसे विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, कौशल उन्नयन और क्षेत्र में वैज्ञानिक जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया है।



