*कूप कटाई के विरोध में सड़कों पर उतरे आदिवासी, वन विभाग को रोकना पड़ा काम*

*छत्तीसगढ़ आजतक, बीजापुर 17 दिसम्बर 2025*
बीजापुर। जिले के गंगालूर क्षेत्र में वन विभाग द्वारा की जा रही कूप कटाई के विरोध में आदिवासी ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। पुसनार और कावडगांव के जंगलों में सैकड़ों हरे-भरे और फलदार पेड़ों की कटाई शुरू होते ही दर्जनभर गांवों के ग्रामीण एकजुट होकर सड़कों पर उतर आए। ग्रामीणों के तीव्र विरोध के बाद फिलहाल वन विभाग को कटाई कार्य रोकना पड़ा है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह क्षेत्र पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है, जहां किसी भी प्रकार की वन कटाई से पहले ग्राम सभा की अनुमति अनिवार्य होती है। आरोप है कि बिना ग्राम सभा की सहमति के जंगल में आरी चला दी गई, जिससे आदिवासियों के जल-जंगल-जमीन से जुड़े संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है।
विरोध प्रदर्शन में बुर्जी, पुसनार, कावडगांव, एसपरमेटा, कुसरे, हिरमगुड़ा, मलुर, हिरोली, कुसमारपारा, मुड़वाही, दुगली और करका सहित आसपास के गांवों के सैकड़ों ग्रामीण शामिल हुए। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि वे अपने जंगलों में किसी भी कीमत पर अवैध कटाई नहीं होने देंगे और आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन को और तेज करेंगे।
बुर्जी की सरपंच सरिता हेमला ने बताया कि वन विभाग ने केवल सूखे और गिरे पेड़ों की कटाई की बात कही थी, लेकिन मौके पर हरे और फलदार पेड़ भी काटे गए हैं, जिसे गांव स्वीकार नहीं करता। वहीं उपसरपंच दुला पुनेम और अन्य ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कुछ चुनिंदा लोगों से चर्चा कर पूरे इलाके में कटाई शुरू कर दी गई।
इस संबंध में वनमंडलाधिकारी आर. रामकृष्णा ने सफाई देते हुए कहा कि कटाई कार्य केंद्र सरकार की स्वीकृति से वैज्ञानिक वन प्रबंधन के तहत किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि केवल चिन्हित और गिरे हुए पेड़ों की कटाई की जा रही है तथा नीलामी से प्राप्त राशि का 20 प्रतिशत ग्राम पंचायत के विकास कार्यों में खर्च किया जाएगा।



