*बीजापुर में काष्ठ कटाई को लेकर फैली भ्रांतियों पर वन विभाग की प्रेस वार्ता*

*छत्तीसगढ़ आजतक, बीजापुर 17 दिसम्बर 2025*
बीजापुर। जिले के पेद्दाकोडेपाल, मुदवेंडी एवं अन्य कूप क्षेत्रों में काष्ठ कटाई को लेकर उत्पन्न विवाद और ग्रामीणों में फैली भ्रांतियों को दूर करने के उद्देश्य से वन विभाग द्वारा मीडिया के माध्यम से एक प्रेस वार्ता आयोजित की गई। यह प्रेस वार्ता जिला मुख्यालय स्थित डीएफओ कार्यालय में संपन्न हुई, जिसमें वनमंडल सामान्य बीजापुर के डीएफओ रंगानाधा रामकृष्णा वाय. एवं इंद्रावती रिजर्व/इंद्रावती टाइगर रिजर्व के डीएफओ संदीप बलगा उपस्थित रहे।
प्रेस वार्ता में डीएफओ ने स्पष्ट किया कि संबंधित कूपों में की जा रही काष्ठ कटाई पूरी तरह वैज्ञानिक पद्धति, वन नियमों एवं ग्राम पंचायत परामर्श के अनुरूप की जा रही है। केवल उन्हीं वृक्षों की कटाई की जा रही है, जो अपनी परिपक्व या वृद्ध अवस्था में पहुंच चुके हैं। उन्होंने बताया कि पेशा कानून के अंतर्गत इस प्रकार की कटाई के लिए किसी विशेष अतिरिक्त अनुमति की आवश्यकता नहीं होती।
डीएफओ ने जानकारी दी कि वर्ष 1992–93 के दौरान बीजापुर क्षेत्र में 30 से 40 कूपों में नियमित रूप से काष्ठ एवं बांस की कटाई होती थी, लेकिन नक्सली गतिविधियों के चलते काष्ठ परिवहन में लगे वाहनों को जलाए जाने जैसी घटनाओं के कारण यह कार्य लगभग 32 वर्षों तक बंद रहा।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण में है, सुरक्षा स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है तथा प्रशासनिक पहुंच मजबूत हुई है। इसी कारण वर्षों से बंद पड़े वन कार्यों को अब चरणबद्ध एवं नियंत्रित ढंग से पुनः प्रारंभ किया गया है। वर्तमान में चार कूपों में पुराने और अनुपयोगी वृक्षों की कटाई की जा रही है।
वन विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य केवल काष्ठ कटाई नहीं, बल्कि वैज्ञानिक वन प्रबंधन, वन संरक्षण, स्थानीय रोजगार सृजन और ग्राम विकास है। कटाई कार्य में रुचि रखने वाले ग्रामीणों को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है।
काष्ठ विक्रय से प्राप्त राशि का 20 प्रतिशत जेएसएम खाते में जमा किया जाएगा, जिससे गांवों में विकास कार्य, बुनियादी सुविधाएं एवं सामुदायिक आवश्यकताओं की पूर्ति की जाएगी। साथ ही, कटाई वाले क्षेत्रों में नियमानुसार पुनः रोपण एवं पुनर्वनीकरण किया जाएगा, ताकि पर्यावरण संतुलन बनाए रखा जा सके



