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छत्तीसगढ़ / मध्यप्रदेशदेशराजनीति

ट्रक ड्राइवरों के साथ फोर व्हीलर व टू व्हीलर मालिको की भी बढ़ेगी परेशानी

वाहन दुर्घटना बीमा से क्या राहत मिलने की संभावना होगी?

आपराधिक कानूनों को स्वदेशी रंग देने वाले भारतीय न्याय संहिता विधेयक को संसद से मंजूरी-देश–शीतकालीन सत्र में मिल गई थी विधेयक मंजूरी।अब कुछ महीनों में आईपीसी के कानूनों की जगह इसके नए प्रावधान ले लेंगे. इस बीच इसके एक कानून को लेकर देश भर में विरोध शुरू हो गया है और यह है हिट एंड रन पर बना नया प्रावधान. इसके अतंर्गत यदि सड़क पर हिट एंड रन की कोई घटना होती है, तो गाड़ी चलाने वाले ड्राइवर को 10 साल की सजा तक हो सकती है. इसके अलावा गाड़ी माल‍िक या ड्राइवर को जुर्माना भी देना होगा. दरअसल वाहन की टक्कर के बाद भाग जाने को हिट एंड रन माना जाता है. अब तक ऐसे मामलों में 2 साल की सजा का प्रावधान था और थाने से जमानत मिल जाती थी.अब नए नियम के मुताबिक, यदि गाड़ी से कोई टकराता है ड्राइवर पुलिस प्रशासन को सूचना दिए बिना मौके से भाग निकलता है तो उसे 10 साल तक की सजा होगी और फाइन भी लगेगा. यह फाइन 7 लाख रुपये तक का हो सकता है. इसी कानून को गलत बताते हुए देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. हरियाणा, दिल्ली, यूपी, एमपी, बिहार समेत कई राज्यों में ट्रक चालकों ने चक्का जाम किया है. ट्रक ड्राइवर ही नहीं बल्कि टैक्सी, ऑटो चालक भी इस नए कानून से परेशान हैं. बता दें कि ट्रक चालकों या माल‍िक पर ही नहीं यह कानून निजी वाहन वालों पर भी समान रूप से लागू होगा. चाहे आप के पास कार हो या बाइक और स्‍कूटर हो. मिनिस्टर अमित शाह ने संसद में बताया था कि नए कानून में सरकार हिट एंड रन के मामलों में सख्त प्रावधान ला रही है. इसके तहत यदि किसी की गाड़ी से सड़क पर कोई टकरा जाता है और ड्राइवर पीड़ित की मदद करने की बजाय उसे मरता छोड़ गाड़ी लेकर या खुद भाग निकलता है तो फिर उसे 10 साल की सजा होगी और जुर्माना देना होगा. वहीं पीड़ित को अस्पताल पहुंचाने या पुलिस प्रशासन को सूचना देने वाले को राहत दी जाएगी. अब तक आईपीसी में ऐसा कोई प्रावधान नहीं था.
दरअसल, ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री के जानकारों और ड्राइवरों का कहना है कि यह कानून दोधारी तलवार है. यदि ड्राइवर हादसे के बाद मौके पर मदद के लिए भी रुकता है तो उसके आगे भीड़ के हमले का खतरा होगा. अकसर ऐसे मामलों में भीड़ हिंसक हो जाती है. यदि वह हमले से बचने के लिए भाग निकलता है तो कानून के अनुसार, उसे 10 साल की कैद होगी. इससे उसका पूरा जीवन सड़क पर हुई एक दुर्घटना के चलते प्रभावित हो सकता है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के वकील रोहित पांडेय के मुताबिक, सरकार के द्वारा कानून में बदलाव के पहल का स्वागत करना चाहिए क्योकि आज कल हिट एंड रन की घटना बहुत देखने को मिल रही है. वहीं इस कानून से लोगों के मन मे भय होगा और अगर कोई अनहोनी होती है तो प्रभावित आदमी उस समय मदद करने की दिशा में सोचेगा.
हिट एंड रन पर नए कानून के विरोध का क्‍या है कारण?
चक्‍काजाम करने वाले ड्राइवरों का दावा है कि ‘हिट एंड रन’ के मामलों में विदेश की तर्ज पर सख्त प्रावधान लाया गया है. इसे लाने से पहले विदेश की तरह बेहतर सड़क और परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए था. प्रदर्शनकारी ड्राइवरों का कहना है कि नए कानून के अनुसार, ‘हिट एंड रन’ मामलों में 10 साल तक की जेल और सात लाख रुपये का जुर्माना हो सकता है. ड्राइवर इतनी बड़ी राशि कैसे भर सकते हैं.

हिट एंड रन पर देश मे अभी तक क्या रहा है मोटर व्हीकल एक्ट कानून?
अब तक हिट एंड रन मामले में आईपीसी की धारा 279 (लापरवाही से वाहन चलाना), 304A (लापरवाही के कारण मौत) और 338 (जान जोखिम में डालना) के तहत केस दर्ज किया जाता है. इसमें दो साल की सजा का प्रावधान है. खास मामलों में आईपीसी की धारा 302 भी जोड़ी जाती है.

ह‍िट एंड रन कानून में नए कानून के अंतर्गत अब क्‍या हो गया है बदलाव?बदलाव के बाद सेक्शन 104(2) के तहत हिट एंड रन के बाद अगर आरोपी ड्राइवर घटनास्थल से भागता है या पुलिस या मजिस्ट्रेट को सूचित नहीं करता है तो उसे 10 साल तक की सजा भुगतनी पड़ेगी. 7 लाख रुपये का जुर्माना भी देना होगा. इस कानून में सभी तरह के गाड़ी चालक शामिल है.

क्‍या ह‍िट एंड रन केस में सजा हो सकती है कम?
हिट एंड रन के मामले में सरकार के द्वारा बनाए गए नए कानून के मुताबिक, अगर कोई ड्राइवर लापरवाही से किसी भी व्यक्ति को टक्कर मारता है तो उसको 10 साल की सजा का प्रावधान और 7 लाख का जुर्माना है, लेकिन अगर कोई ड्राइवर किसी भी व्यक्ति को टक्कर मारता है और वह संबंधित अथॉरिटी यानी कि अस्पताल और पुलिस के समक्ष पेश होता है तो घायल व्यक्ति की अवस्था को देखकर उसकी सजा में नरमी बरती जा सकती है. सुप्रीम कोर्ट के वकील मनीष दुबे ने बताया की परिस्थितियों को देखकर अदालत ड्राइवर की सजा में नमी बरत सकती है अगर व्यक्ति ज्यादा घायल नहीं. आमतौर पर पुलिस स्टेशन पर ही घायल व्यक्ति की स्थिति को देखकर टक्कर मारने वाले ड्राइवर के सजा का आंकलन किया जा सकता है और यह अधिकार संबंधित पुलिस थाने के मौजूदा जांच अधिकारी पर निर्भर करता है.

अगर भीड़ प‍ीटती है तो मॉब ल‍िंच‍िंग का केस होगा दर्ज?
ह‍िट एंड रन के मामलों में ट्रक ड्राइवरों की यह दलील है क‍ि अगर वह एक्‍स‍िडेंट के बाद घायल शख्‍स की मदद करने की कोश‍िश करेंगे तो आक्रोश में भीड़ उन्‍हें पीट सकती है. ऐसे में नए कानून के मुताब‍िक, अगर आम जनता ऐसा करती है तो उसके ख‍िलाफ मॉब ल‍िंच‍िंग का केस दर्ज हो सकता है. ज‍िसमें फांसी की सजा तक का प्रवाधान है.

दो कोर्ट से म‍िलेगा मुआवजा
अब एक्‍स‍िडेंट केस में घायल शख्‍स को नए कानून के तहत क्र‍िम‍िनल कोर्ट से अपराध साब‍ित होने पर 7 लाख रुपये तक का मुआवजा म‍िल सकेगा. इतना ही नहीं एमएसीटी कोर्ट से घायल शख्‍स को इंशोरेंस कंपनी से मुआवजा पाने का हकदार होगा. अगर एक्‍स‍िडेंट करने वाली कार का इंश्‍योरेंस नहीं है तो पीड़‍ित शख्‍स को मुआवजा कार माल‍िक या ड्राइवर देगा.

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