*बस्तर जिले में खाद-बीज पर्याप्त उपलब्ध, किसानों ने अब तक 7800 क्विंटल बीज और 12700 मैट्रिक टन से ज्यादा खाद का किया उठाव*

*कृषकों को धान का थरहा डालने सहित लघु धान्य फसलों की बुवाई करने की सलाह*
*छत्तीसगढ़ आजतक,जगदलपुर, 03 जुलाई 2025*
जिले में मानसून की अच्छी स्थिति होने के फलस्वरूप खरीफ फसल सीजन में किसानों के द्वारा कृषि कार्य तीव्र गति से किया जा रहा है। जिससे किसान खरीफ धान के साथ ही दलहन-तिलहन की बुवाई कर रहे हैं। वहीं लघु धान्य फसलों की बुवाई में लगे हैं। जिले में खरीफ फसल सीजन के लिए किसानों द्वारा आदिम जाति सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से खाद एवं बीज का उठाव प्रगति पर है।
उपसंचालक कृषि श्री राजीव श्रीवास्तव ने बताया कि जिले की 52 आदिम जाति सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से कृषि आदान सामग्री का वितरण किया जा रहा है। खरीफ वर्ष 2025 में अब तक धान, दलहन एवं लघु धान्य फसलों के कुल 10496 क्विंटल भण्डारण के विरूद्ध 7868 क्विंटल बीज का वितरण किया जा चुका है। वर्तमान में जिले के आदिम जाति सेवा सहकारी समितियों में पर्याप्त मात्रा में बीज उपलब्ध है। इसी प्रकार रासायनिक उर्वरक के कुल लक्ष्य 44462 मैट्रिक टन के विरूद्ध 37671 मैट्रिक टन खाद भंडारण के एवज में वर्तमान में किसानों द्वारा 12700 मैट्रिक टन से ज्यादा खाद का उठाव किया जा चुका है।
उपसंचालक कृषि श्री राजीव श्रीवास्तव ने किसानों को खरीफ फसल बुवाई हेतु समसामयिक कृषि परामर्श देते हुए कहा है कि धान का थरहा डालने या बुवाई से पूर्व स्वयं उत्पादित बीजों को 17 प्रतिशत नमक के घोल से उपचारित करें। प्रमाणित या आधार श्रेणी के बीजों को पैकेट में प्रदाय किए गए फफूंद नाशक से अवश्य उपचारित करें एवं जल्द ही रोपाई का कार्य सम्पन्न करें। किसान भाई अरहर एवं अन्य दलहनी फसलों के लिए कल्चर का उपयोग करें।जिसके तहत बुवाई हेतु तरल जैव उर्वरक को 5 प्रतिशत शक्कर या गुड़ के ताजे घोल (50 ग्राम शक्कर या गुड़ प्रति लीटर पानी) से 5 से 10 गुना पतला करके इस घोल को 5-15 मिली लीटर मात्रा से प्रति किलोग्राम बीज को उपचारित करें। जिन क्षेत्रों में लघु धान्य फसलें जैसे कोदो-कुटकी,रागी एवं सांवा की बुवाई की जाती है, उन क्षेत्रों में लघु धान्य फसलों को रोपा पद्धति से लगाने पर अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।



