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कोंडागांवछत्तीसगढ़ / मध्यप्रदेश

अनुसूचित जाति,जनजाति वर्ग के भारत बंद का दिखा व्यापक असर

सुप्रीम कोर्ट के फैसले जातियों में वर्गीकरण को लेकर भारत बंद का किया गया था आह्वान

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कोंडागांव के चौपाटी मैदान में बंद को लेकर की गई आमसभा

हजारों की संख्या में अनुसूचित जाति व जनजातीय वर्ग के द्वारा शहर में निकाली गई रैली।

डॉ. अम्बेडकर के छाया चित्र लेकर उनके जयकारों के साथ निकले लोग।

*छत्तीसगढ़ आजतक, कोंडागांव  21 अगस्त 2024*

सुप्रीम कोर्ट ने एक अगस्त 2024 को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आरक्षण बारे में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा कि सरकार इन समुदायों के आरक्षण सीमा के भीतर अलग से वर्गीकरण कर सकती है।

मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस बेला त्रिवेदी, जस्टिस पंकज मित्तल, जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की सात जजों की बेंच के छह न्यायाधीशों ने एससी-एसटी आरक्षण में उप-वर्गीकरण के पक्ष में फ़ैसला सुनाया, जबकि एक न्यायाधीश ने इसका विरोध किया,फ़ैसला सुनाते समय यह सिफ़ारिश भी की गई कि अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षण में क्रीमी लेयर का प्रावधान होना चाहिए और यह अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी वर्ग पर लागू क्रीमी लेयर के प्रावधान से अलग होना चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के सुनाए फ़ैसले के बारे में बॉम्बे हाई कोर्ट के वकील संघराज रूपवते ने कहा, “सत्तारूढ़ राजनीतिक दलों ने एक बार फिर अदालत की आड़ में वही किया है जो वे चाहते थे. यह एक ऐसा फ़ैसला है जो हमें जातिविहीन समाज से दूर ले जाता है. अनुसूचित जाति और जनजाति के उप-वर्गीकरण की अनुमति देना छह न्यायाधीशों की एक बड़ी गलती है. जस्टिस बेला त्रिवेदी की एकमात्र असहमति ही संवैधानिक क़ानून का सही पुनर्कथन है।

कोंडागांव के चौपाटी मैदान में सभा व रैली

सुप्रीम कोर्ट के जातियों में वर्गीकरण के फैसले के बाद अनुसूचित जाति व अनसूचित जनजाति के समुदायों में भारी आक्रोश देखा गया।कोर्ट के फैसले के खिलाफ विभिन्न संगठनों ने भारत बंद का फैसला लिया जिसमे अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के लोगों ने खुला समर्थन दिया,इसी के तहत आज सम्पूर्ण भारत बंद का व्यापक असर देखने को मिला।

कहावत-जब प्यास लगे,तब कुंवा खोदो

अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति व पिछड़ा वर्ग के लोगों में हमेशा कमी देखने को आई,जिसमें समय-समय पर सरकार द्वारा आरक्षण को लेकर बदलाव की बात कही जाती रही,लेकिन तीनो वर्गों को अपने हितों को लेकर लापरवाही देखी गई,तीनो वर्गों द्वारा ऐसी सरकार को बिठाने में अहम भूमिका निभाई जो खुलेतौर पर आरक्षण में बदलाव की बात करती रही,संविधान को बदलने की बात करती रही,परिणामस्वरूप भारत बंद जैसे कदम उठाने की नौबत आई है।इस फैसले को पुनर्विचार व रोक लगाने हेतु रैली के रूप में कलेक्टर कार्यालय जाकर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के नाम से ज्ञापन सोपा गया,जहाँ  कुछ आक्रोशित लोगों द्वारा कलेक्टर कार्यालय में लगे बैरिकेट तोड़ा गया व मुख्य गेट को भी छतिग्रस्त कर दिया गया,इस मामले में पुलिस ने कुछ लोगो पर कार्यवाही करते हुए अभी तक 30 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

क्या सुप्रीम कोर्ट के फैसले में राजनीतिक एंगल हो सकता है?

लीटरल एंट्री के माध्यम से केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में विभिन्न पदों में भर्ती में आरक्षण का पालन नही किया गया विभिन्न संगठनों व राजनीतिक पार्टियों ने शंका जाहिर करते हुए राजनीतिक एंगल से इनकार नही किया है,वही केन्द्र सरकार द्वारा इस फैसले पर कोई बयान नही दिया है।

गेंद अब केंद्र सरकार के पाले में

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आरक्षण को देश के सभी राज्यो में इस फैसले को लागू किया जायेगा साथ ही राज्यो के हाईकोर्ट द्वारा भी इसकी विवेचना की जाएगी,अब सवाल उठता है कि इस फैसले का समाधान एससी,एसटी वर्ग के पक्ष में कैसे हो।केन्द्र सरकार संसद के माध्यम से कानून में संशोधन नही करती तब तक बने नए कानून का देश मे पालन होगा।

Chhattisgarh Aaj Tak
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