बालोद जिला की फास्ट्रैक कोर्ट के निर्णय आजीवन कारावास को हाई कोर्ट बिलासपुर ने किया निरस्त

फास्ट्रैक कोर्ट बालोद के द्वारा पारित आजीवन कारावास के निर्णय को माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर के चीफ जस्टिस मान. रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविन्द्र कुमार अग्रवाल की पीठ ने किया रद्द
बिलासपुर.माननीयउच्च न्यायालय ने माना कि लड़की बालिक थी और सहमत पक्षकार थी, इस कारण से आरोपी ने भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (2) N और पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत कोई अपराध नहीं किया है, जेल से तुरंत रिहा किया जाए..*
*….जानकारी के अनुसार बालोद निवासी लड़का प्रेम, दिल्ली निवासी पूजा (बदला हुआ नाम) दोनों प्यार करते थे, अलग अलग धर्म से होने के कारण से पूजा के परिवार वाले उनका विवाह उनके समाज के ही लड़के से तय कर सगाई की रश्म भी पूरा कर दिया गया था परंतु बाद में सगाई टूट गई जिसके जिम्मेदार प्रेम ही होगा की संभावना में राजहरा थाना में रिपोर्ट दर्ज कराये जाने पर प्रेम के विरुद्ध पेक्सो अधिनियम के तहत अपराध दर्ज कर जेल भेजा गया था, अधिवक्ता भेष कुमार साहू के द्वारा आरोपी की ओर से पैरवी करते हुए जमानत कराए जाने पर प्रेम और पूजा ने विवाह पंजीयक अधिकार बालोद के समक्ष विवाह कर जीवन का आनंद ले रहे थे कि इसी समय विशेष न्यायालय बालोद के द्वारा दिनांक 12 अक्टूबर 23 को प्रेम को, पूजा के साथ नाबालिक जानते हुए उसके साथ में बलात्कार करने के आरोप में आजीवन कारावास से दंडित किए जाने पर प्रेम को दीपावली जैसे पर्व जेल में बिताना पड़ा था, उसकी नौकरी भी छूट गई, …इसकी अपील उच्च न्यायालय बिलासपुर में की गई थी जिस पर 2 जनवरी 24 को निर्णय पारित करते हुए आरोपी के उपरोक्त सजा को निरस्त कर प्रेम को तुरंत जेल से रिहा करने का आदेश जारी किया है..*
उपरोक्त निर्णय से प्रेम और पूजा के परिवार के साथ ही न्याय परिवार से जुड़े लोगों ने सत्य की जीत बताते हुए खुशी जाहिर की है



