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कोंडागांवछत्तीसगढ़ / मध्यप्रदेशस्वास्थ्य

विश्व सिकलसेल दिवस जागरुकता कार्यक्रम और सिकलसेल स्क्रीनिंग का किया गया आयोजन

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जेनेटिक कार्ड तथा पौष्टिक आहार का किया गया वितरण

छत्तीसगढ़ आजतक,कोंडागांव, 19 जून 2024– विश्व सिकलसेल दिवस के अवसर पर बुधवार 19 जून को पूरे जिले में जागरुकता कार्यक्रमों के आयोजनों के साथ ही सिकलसेल की स्क्रीनिंग की गई। मुख्य कार्यक्रम जिला कार्यालय के प्रथम तल स्थित सभाकक्ष में आयोजित की गई।
जिला पंचायत के अध्यक्ष श्री देवचंद मातलाम, उपाध्यक्ष श्रीमती भगवती पटेल, सदस्य श्री बालसिंह बघेल, कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अविनाश भोई ने छत्तीसगढ़ महतारी के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर जेनेटिक कार्ड के वितरण के साथ ही पौष्टिक आहार का वितरण भी किया गया।
इस अवसर पर जिला पंचायत के अध्यक्ष श्री देवचंद मातलाम ने कहा कि सिकलसेल और एनीमिया जैसे रोगों पर नियंत्रण के माध्यम से ही स्वस्थ जीवन का आनंद प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इन रोगों के कारण लोगों की कार्यक्षमता प्रभावित होती है, जिसका दुष्परिणाम जिले के विकास पर भी पड़ता है। इन रोगों पर नियंत्रण के लिए जागरुकता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि एनीमिया के कारणों में एक कारण खानपान की आदतों में बदलाव भी शामिल है। अतः एनीमिया से बचने के लिए पर्याप्त मात्रा में पौष्टिक आहार का सेवन करना चाहिए। उपाध्यक्ष श्रीमती भगवती पटेल ने कहा कि स्कूल, आश्रम-छात्रावास के अध्ययरत सभी बच्चों का स्क्रीनिंग करते हुए आवश्यक उपचार का सुझाव दिया।
शत-प्रतिशत स्क्रीनिंग का लक्ष्य किया जा चुका है हासिलरू श्री दुदावत
कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत ने कहा कि सिकलसेल दिवस के अवसर पर सभी स्वास्थ्य केन्द्रों के साथ ही हेल्थ एंड वेलनेस केन्द्रों में भी जागरुकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। सिकलसेल की जांच के साथ ही मरीजों को उपचार भी उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सिकलसेल के रोगियों की पहचान और उपचार अत्यंत आवश्यक है, इसलिए जिले में 40 वर्ष से कम आयु के सभी लोगों के सिकलसेल की जांच का लक्ष्य कोंडागांव में हासिल किया जा चुका है तथा अब जेनेटिक प्रमाण पत्र भी वितरित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सिकलसेल के साथ एनीमिया हो तो, अत्यंत घातक स्थिति निर्मित होती है। जिले में एनीमिया पर नियंत्रण का कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है। इसके तहत 40 वर्ष से कम आयु की गर्भवती और शिशुवती महिलाओं के साथ ही किशोरी बालिकाओं के एनीमिया की जांच भी की जा रही है तथा दूसरे चरण की जांच भी इस माह प्रारंभ होगी। उन्होंने कहा कि महिलाओं के एनीमिक होने पर आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि विकसित और अग्रणी कोंडागांव बनाने के लिए आवश्यक है कि सभी कोंडागांववासी स्वस्थ रहें तथा इस दिशा में जिला प्रशासन लगातार कार्य कर रही है।
इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आरके सिंह, आदिवासी विकास विभाग की उपायुक्त डॉ रेशमा खान, जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. आरसी ठाकुर, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की जिला कार्यक्रम प्रबंधक श्रीमती भावना महलवार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

सिकलसेल जागरुकता रथ को कलेक्टर ने दिखाई हरी  झंडी

विश्व सिकलसेल दिवस के अवसर पर जिले में सिकलसेल के प्रति जागरुकता लाने के लिए जागरुकता रथों का संचालन किया जा रहा है। कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत ने बुधवार को जिला कार्यालय परिसर से जागरुकता रथों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अविनाश भोई मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आरके सिंह, आदिवासी विकास विभाग की उपायुक्त डॉ रेशमा खान, जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. आरसी ठाकुर, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की जिला कार्यक्रम प्रबंधक श्रीमती भावना महलवार सहित अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

सफलता की कहानी—कोंडागांव जिले ने प्राप्त किया शत-प्रतिशत सिकलसेल स्क्रीनिंग का लक्ष्य

कोंडागांव जिले ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए सिकल सेल एनीमिया की शत-प्रतिशत स्क्रीनिंग का लक्ष्य पूरा कर लिया है। यह उपलब्धि राज्य और जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय समुदाय के सहयोग से संभव हो पाई है। जिले में कुल 5 लाख 31 हजार 899 लोगों की स्क्रीनिंग की गई, जिसमें 11 हजार 322 सिकलसेल वाहक एवं 675 सिकलसेल रोगियों की पहचान की गई। विश्व सिकलसेल दिवस के अवसर पर इन्हें जेनेटिक कार्ड तथा पौष्टिक आहार भी प्रदान किए गए।
जागरूकता और पहल
इस उपलब्धि के लिए जिले में व्यापक जागरूकता अभियान चलाया गया। स्वास्थ्य विभाग ने ग्राम स्तर पर शिविर आयोजित किए और समुदाय के लोगों को इस बीमारी के लक्षण और इसके प्रभावों के बारे में जानकारी दी। स्थानीय पंचायतों और स्वयंसेवी संगठनों ने भी इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई।
सामुदायिक सहयोग
कोंडागांव जिले के प्रत्येक गांव में स्वास्थ्य कर्मियों ने घर-घर जाकर स्क्रीनिंग की और सिकल सेल एनीमिया के संभावित मामलों की पहचान की। इस पहल के तहत विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं की जांच पर जोर दिया गया। इस प्रयास के परिणामस्वरूप, प्रारंभिक अवस्था में ही इस बीमारी का पता चल सका और समय पर उपचार शुरू किया जा सका।
कोंडागांव जिले की यह उपलब्धि सिकल सेल एनीमिया के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और अन्य जिलों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। इससे न केवल इस गंभीर बीमारी की पहचान और उपचार में मदद मिलेगी, बल्कि इससे प्रभावित लोगों की जीवन गुणवत्ता में भी सुधार होगा।
इस बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने और इसे नियंत्रित करने के उद्देश्य से 19 जून 2024 को एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सिकल सेल एनीमिया के लिए सभी लोगों की स्क्रीनिंग सुनिश्चित करना है ताकि समय पर निदान और उपचार हो सके।
सिकल सेल एनीमिया एक अनुवांशिक विकार है, जिसमें लाल रक्त कोशिकाएं असामान्य रूप से गोल की बजाय हंसिये (सिकल) के आकार की हो जाती हैं। यह स्थिति ऑक्सीजन परिवहन को बाधित करती है और कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है, जैसे कि अनीमिया, संक्रमण, और अंगों को नुकसान। इस बीमारी के लक्षणों में कमजोरी, दर्द, और संक्रमण का उच्च जोखिम शामिल हैं।
सिकल सेल एनीमिया की जांच की यह पहल सरकार की इस बीमारी से प्रभावित लोगों को बेहतर जीवन गुणवत्ता देने के लिए है। इसमें नवजात शिशुओं की स्क्रीनिंग, नियमित स्वास्थ्य जांच, और आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं का प्रावधान शामिल है। इस कार्यक्रम के तहत, सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिया गया है, कि वे अपने क्षेत्रों में सिकल सेल एनीमिया की स्क्रीनिंग सुनिश्चित करें और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराएं, महत्वपूर्ण कदम से देश में सिकल सेल एनीमिया के मामलों की शीघ्र पहचान और प्रभावी उपचार संभव हो सकेगा, जिससे इस बीमारी से होने वाली जटिलताओं को कम किया जा सकेगा और प्रभावित लोगों की जीवन गुणवत्ता में सुधार किया जा सकेगा।

मिशन के प्रमुख उद्देश्य

1. 100 प्रतिशत स्क्रीनिंगः मिशन के तहत प्रत्येक नवजात शिशु और संभावित जोखिम वाले व्यक्तियों की 100 प्रतिशत स्क्रीनिंग
2. जागरूकता अभियानः सिकल सेल एनीमिया के लक्षण, उपचार और प्रबंधन के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए व्यापक अभियान
3. उपचार और देखभालः प्रभावित व्यक्तियों को मुफ्त और उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सेवाएं
4. अनुसंधान और विकासः सिकल सेल एनीमिया के निदान और उपचार में नवाचार और अनुसंधान को बढ़ावा

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