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कोंडागांवछत्तीसगढ़ / मध्यप्रदेशमांग

*सर्व आदिवासी समाज जिला कोण्डागांव ने सौंपा ज्ञापन, 15 नवम्बर को होगा महाबंद*

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*एसडीएम को सौंपा ज्ञापन, सोनम वांगचुक को निःषर्त रिहा करने सहित 04 मांग सम्बन्धी*

*छत्तीसगढ़ आजतक,कोण्डागांव 04 अक्टूबर 2025*

महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी मुर्मू, प्रधान मंत्री नरेन्द्र दामोदार मोदी को सम्बोधित और ’’केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से अपने अधिकार के लिए किए जा रहे संघर्ष का समर्थन एवं पर्यावरणविद जनप्रिय नेता सोनम वांगचुक को रिहा करने’’ विषयक एक ज्ञापन को सर्व आदिवासी समाज जिला कोण्डागांव के जिला अध्यक्ष बंगाराम सोढ़ी के नेतृत्व में तथा लुभासिंग नाग हल्बा समाज अध्यक्ष, रामलाल नेताम सचिव, जीवनलाल नाग संयुक्त सचिव जिला कोंडागांव, रूपसिंह सलाम कार्यकारी सदस्य, विश्वनाथ कोड़ोपी, फतेसिंह जुर्री, शिवाजी नेताम, दसरू नेताम जनपद सदस्य, मुकेश पोयाम अध्यक्ष युवा छात्र संगठन जिला कोंडागांव, उमेश नेताम, मुन्ना नेताम आदि सभी साथियों की उपस्थिति में एसडीएम को सौंपा गया है। ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि लद्दाख के संविधान सम्मत मुद्दों पर आधारित लोकतांत्रिक अहिंसक जन आंदोलन पर दमन बंद करें और सोनम वांगचुक को रिहा करें। वर्तमान सरकार के द्वारा चुनावी घोषणा पत्र में लद्दाख को छठवीं अनुसूची में शामिल करने घोषणा किया गया था। उस अनुरूप वहां के जनता लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर रहे हैं। अचानक हिंसा से लोगों की जान चली गई, इसका उच्च स्तरीय जांच होना चाहिए। सर्व आदिवासी समाज जिला कोण्डागांव निम्नानुसार बिन्दुओं पर ध्यानाकर्षण चाहती है 1.देशप्रेमी सोनम वांगचुक को रिहा करें, उनके खिलाफ कठोर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत लगाए गए झूठे आरोपों को वापस ले और उनकी जोधपुर से लेह तक सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करे। 2.लद्दाख के लोगों और उनकी जायज और लोकतांत्रिक मांगों पर, विशेष रूप से छठी अनुसूची का दर्जा और पूर्ण करे। 3. लद्दाखी नागरिकों पर हिंसा और गोलीबारी की घटना, जिसके परिणामस्वरूप चार लोगों की दुखद रूप से मृत्यु हुई है जिसकी उच्चस्तरीय और स्वतंत्र न्यायिक जांच करे। 4. अगर उन्हें संवैधानिक सुरक्षा नहीं मिली, तो लद्दाख के लोग और वहां का पर्यावरण दोनों ही गंभीर खतरे में पड़ सकते हैं। लद्दाख को संविधान के छठवीं अनुसूची के तहत सुरक्षा और पूर्ण राज्य का दर्जा देना केवल न्याय संगत मांग है। लद्दाख के अधिकांश लोग अनुसूचित जनजातियों से हैं और छठी अनुसूची की सुरक्षा के लिए हकदार भी। ये कदम लद्दाख के लोगों को उनकी जमीन, संसाधनों और शासन पर समस्त आदिवासी समाजों के अधिक नियंत्रण देने में मदद करेंगे, जिससे इन इलाकों में विकास को स्थायी, पर्यावरण के अनुकूल और स्थानीय जरूरतों के अनुसार बनाया जा सके। इसके जरूरत इसलिए भी है क्योंकि केंद्र सरकार लद्दाख में बड़ी परियोजनाओं और नीतिगत बदलावों पर सक्रियता से विचार कर रहा है और बड़े पैमाने पर भूमि और संसाधनों को कार्पोरेट संस्थाओं को सौंप रहा है, जैसा कि अन्य हिमालयी राज्यों में हो रहा है। 5. लेह में हुई अचानक हिंसा के लिए सोनम वांगचुक को दोषी ठहराकर और उन्हें झूठे आरोपों में गिरफ्तार करके, केंद्र सरकार अनावश्यक रूप से तनावपूर्ण स्थिति को बढ़ा रही है। जबकि सोनम ने स्पष्ट रूप से हिंसा की निंदा की और किसी भी प्रकार की हिंसा को स्वीकार करने से इन्कार करते हुए, 15 वें दिन अपना अनशन वापस ले लिया। केंद्र सरकार सोनम को निशाना बनाकर और उनका उत्पीड़न करके क्षेत्र में और अधिक गुस्सा और अलगाव को बढ़ावा दे रही है। शांतिपूर्ण जन आंदोलनों की आवाजों को दबाने और उन पर प्रहार करने से अक्सर अनियंत्रित हिंसा होती है और केंद्र सरकार इस समस्या को भड़काने के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार है। हम लद्दाखी लोगों के संवैधानिक अधिकारों के लिए, छठी अनुसूची संरक्षण और राज्य दर्जे की मांग में उनके साथ है ताकि उनकी भूमि, संस्कृति और नाजुक हिमालय सुरक्षित रहे। हम मानते है की छत्तीसगढ़ के बस्तर, सरगुजा सहित भारत की सारी आदिवासी क्षेत्र में संविधान सम्मत स्वशासी व्यवस्था अविलंब लागू होना चाहिए। उपरोक्त सभी मांगों को केंद्र सरकार 12 नवंबर तक संवेदनशीलता के साथ पूरी करे, अन्यथा 15 नवंबर को बिरसा मुंडा की जयंती पर पूरे देश में आदिवासी समाज भारत बंद करते हुए राष्ट्रव्यापी क्रांति का बिगुल फूंकेगा इसकी समस्त जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होगी।
इसके अतिरिक्त ग्राम नालाझर में हुए फर्जी नक्सली मुठभेड़, आदिवासी महिला कर्मचारियों को प्रताड़ित करने तथा एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय चिचाड़ी जिला कोण्डागांव में अध्ययनरत छात्र के आत्महत्या संबंधी अन्य तीन ज्ञापन सौंपे गए हैं।

Chhattisgarh Aaj Tak
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