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कोंडागांवछत्तीसगढ़ / मध्यप्रदेशदेश

*तो आखिर साबित हो ही गया कि देश में मतदाता सूची में भारी गड़बड़ी है और कांग्रेस पार्टी लगातार जो आरोप चुनाव आयोग पर लगा रही है वह सच है।*

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*छत्तीसगढ़ आजतक, दिल्ली 26 सितम्बर 2025*

“तो आखिर साबित हो ही गया कि देश में मतदाता सूची में भारी गड़बड़ी है और कांग्रेस पार्टी लगातार जो आरोप चुनाव आयोग पर लगा रही है वह सच है।
कॉंग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार “वोट चोर गद्दी छोड़” अभियान छेड़े हुए हैं।”
उसी कड़ी में आज सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तराखंड में हुए पंचायत चुनाव को लेकर दूध का दूध पानी का पानी कर ही दिया।

उत्तराखंड में “डबल वोटर, डबल खेल” पर सुप्रीम कोर्ट का हंटर –

राज्य निर्वाचन आयोग पर ₹2 लाख का जुर्माना।

लोकतंत्र की नींव पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव हैं। अगर मतदाता सूची ही संदेहास्पद हो जाए, तो चुनाव की पवित्रता पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है। उत्तराखंड राज्य निर्वाचन आयोग का हालिया परिपत्र इसी शंका को जन्म देता था। आयोग ने यह कहकर दरवाज़ा खोल दिया कि एक ही व्यक्ति का नाम एक से अधिक मतदाता सूचियों में हो, तो भी उसका नामांकन रद्द न किया जाए।

यह तर्क न सिर्फ़ असंगत था बल्कि उत्तराखंड पंचायती राज अधिनियम, 2016 के वैधानिक प्रावधानों का सीधा उल्लंघन भी। कानून साफ कहता है कि कोई भी व्यक्ति एक से अधिक मतदाता सूची में नाम दर्ज नहीं करा सकता।

हाईकोर्ट ने इस पर सख्ती दिखाई और आयोग के स्पष्टीकरण पर रोक लगा दी। जब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा, तो वहाँ भी आयोग को कोई सहारा नहीं मिला। उलटे शीर्ष अदालत ने दो टूक शब्दों में आयोग से पूछा कि–

“आप वैधानिक प्रावधानों के विपरीत निर्णय कैसे ले सकते हैं?”

₹2 लाख का जुर्माना इस बात का प्रतीक है कि लोकतंत्र की रक्षा में अदालतें कोई समझौता नहीं करेंगी। यह आदेश न सिर्फ़ निर्वाचन आयोग बल्कि अन्य सभी संवैधानिक संस्थाओं के लिए भी चेतावनी की घंटी है कि वे अपने अधिकार क्षेत्र की सीमा लांघकर क़ानून से खिलवाड़ न करें।

यह निर्णय लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक है। इससे यह संदेश गया है कि चुनाव की पवित्रता और कानून की मर्यादा किसी भी संस्थागत ढील या मनमानी से ऊपर है। जनता को भरोसा होना चाहिए कि न्यायपालिका हर हाल में मताधिकार की गरिमा और संविधान की आत्मा की रक्षा करेगी।

Chhattisgarh Aaj Tak
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