*नए साल में शुरू नहीं होगी बस्तर ट्रेन*

*छत्तीसगढ़ आजतक, जगदलपुर 30 दिसम्बर 2025*
एक केंद्रीय राज्य मंत्री सहित 10 भाजपा सांसदों की केंद्र में मौजूदगी के बावजूद छत्तीसगढ़ से जुड़ी रेलवे और हवाई सेवाओं की जनाकांक्षाएं पूरी नहीं हो रही हैं। खासतौर पर रेलवे से जुड़ी आम लोगों की मांगों पर लंबे समय से सिर्फ आश्वासन चल रहा है। दिल्ली में रेल मंत्री के साथ सांसदों की मुलाकातों की तस्वीरें समय-समय पर सामने आती हैं, जिससे लोगों को उम्मीद बंधती है कि उनके क्षेत्र में रेल सेवाओं का विस्तार होगा, लेकिन उम्मीद बार-बार टूट जाती है बात यदि बस्तर को राज्य की राजधानी रायपुर से जोडने की करें, तो कभी एक ट्रेन इस जरूरत को काफी हद तक पूरा करती थी। यह ट्रेन थी दुर्ग-जगदलपुर-दुर्ग एक्सप्रेस, जिसकी शुरुआत वर्ष 2012 में हुई थी। यह भले ही सीधे रायपुर तक नहीं पहुंचाती थी, लेकिन दुर्ग पहुंचने के बाद बस्तर के लोगों के लिए राजधानी से जुडना आसान हो जाता था। करीब 16 घंटे और 640 किलोमीटर की लंबी यात्रा होने के बावजूद, अधिकतर सफर रात में होने और किराया किफायती होने के कारण यह ट्रेन यात्रियों की पहली पसंद बनी रही।यह ट्रेन न केवल बस्तर को जोड़ती थी, बल्कि ओडिशा के प्रमुख शहरों खरियार रोड, कांटाबांजी और रायगढ़ा से भी संपर्क होता था। यूपीए-2 सरकार के दौरान शुरू की गई इस ट्रेन को केंद्र में भाजपा सरकार आने के बाद बंद कर दिया गया। कुछ समय के लिए इसे दोबारा चलाया गया, लेकिन फिर रोक दिया गया। वजह बताई गई कि यह ट्रेन रेलवे की आय के ढांचे में फिट नहीं बैठती।इस महीने सांसद महेश कश्यप ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात कर इस ट्रेन का मुद्दा उठाया था। मंत्री की ओर से गंभीरता से विचार करने का आश्वासन भी दिया गया। लेकिन हाल ही में जारी नई रेलवे समय-सारिणी में जगदलपुर-दुर्ग-जगदलपुर ट्रेन का नाम नहीं है। इससे बस्तर के लोगों की उम्मीदों को एक बार फिर झटका लगा है।विडंबना यह है कि रेलवे एक-एक साधारण यात्री ट्रेन के घाटे और मुनाफे का हिसाब तो लगाती है, लेकिन वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी महंगी ट्रेनों से हो रहे नुकसान की चिंता नहीं करती, जिनकी टिकटें आम यात्रियों की पहुंच से बाहर हैं। हजारों यात्रियों को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाने वाली ट्रेन के घाटे को आधार बनाकर बंद कर दिया जाता है।यह सही है कि रेलवे को नुकसान नहीं होना चाहिए, लेकिन कारोबारी, छात्र और नौकरीपेशा लोग ऐसी ट्रेनों से न सिर्फ यात्रा करते हैं, बल्कि समय और पैसे की बचत भी करते हैं। इस तरह वे देश की अर्थव्यवस्था में कुछ तो योगदान देते हैं। वैसे भी रेलवे आरक्षित टिकटों पर यह स्वीकार करती है कि यात्री सेवाओं के खर्च का बड़ा हिस्सा वह स्वयं वहन करती है।इधर, बिलासपुर रेलवे जोन देश के सर्वाधिक राजस्व देने वाले जोनों में शामिल है। यहां से कोयला, बॉक्साइट और सीमेंट जैसे खनिजों की मिलियन्स टन ढुलाई रेलवे को निरंतर आय देती है। ऐसे में कम से कम इतनी उम्मीद तो की जा सकती है कि रेलवे बिना नफा-नुकसान की गिनती किए, छत्तीसगढ़ में यात्री सेवाओं का विस्तार करे।रेल मंत्री वर्ष में दो-तीन बार वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह बताते हैं कि छत्तीसगढ़ में रेलवे अधोसंरचना पर पहले से कई गुना अधिक खर्च किया जा रहा है। यदि वास्तव में इतनी उदारता और निवेश है, तो फिर रेल सुविधाओं का विकास छत्तीसगढ़ के लोगों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप क्यों नहीं हो रहा है?
सिटी ब्यूरो जगदलपुर जय प्रकाश सिंह ( मुनमुन सिंह)



