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कोंडागांवछत्तीसगढ़ / मध्यप्रदेश

*बस्तर में कृषि क्रांति-25 वर्षों में फसल क्षेत्र दोगुना, बीज वितरण में 10 गुना वृद्धि*

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*धान का वाजिब दाम से किसानों की बढ़ी खुशहाली*

*छत्तीसगढ़ आजतक,जगदलपुर, 07 नवम्बर 2025*

बस्तर जिले में पिछले 25 वर्षों के दौरान खेती-किसानी में एक अद्वितीय परिवर्तन परिलक्षित हुई है। वनों एवं प्रकृति की गोद में बसे इस आदिवासी बहुल क्षेत्र में जहां कभी खेती की राहें कठिन थीं, आज हरे-भरे खेत लहलहा रहे हैं। किसानों की मेहनत से न केवल फसल उत्पादन क्षेत्र में इजाफा हुआ है, साथ ही किसानों की आय में भी अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। यह उपलब्धि न केवल उत्पादन की दिशा में मिसाल बनी है, बल्कि हजारों किसान परिवारों की समृद्धि की कहानी है।
बस्तर जिले के अंतर्गत वर्ष 2000 में जहां फसल उत्पादन का कुल क्षेत्र मात्र 1,58,919 हेक्टेयर था, वहीं अब 2025 तक यह बढ़कर 2,00,310 हेक्टेयर हो चुका है। यानी लगभग 26 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह विस्तार बस्तर के दुर्गम इलाकों तक पहुंचा है, जहां पहाड़ियां और असमतल भूमि खेती को चुनौती देती रही हैं। बीज वितरण के मामले में वर्ष 2000 में मात्र 3,109 क्विंटल बीज उपलब्ध कराए गए थे, जो अब 32,253 क्विंटल तक पहुंच चुकी है यानी करीब 10 गुना की आशातीत बढ़ोत्तरी हुई है।
जिले में सिंचित क्षेत्र का विस्तार भी कमाल का रहा है। वर्ष 2000 में जहां सिंचाई की सुविधा सिर्फ 3,669 हेक्टेयर तक सीमित थी, वहीं आज यह 24,280 हेक्टेयर तक फैल चुकी है जो सात गुना से अधिक की बढ़ोतरी है। नहरें, तालाब और ड्रिप इरिगेशन जैसी योजनाओं ने बस्तर के सूखाग्रस्त इलाकों को हरा-भरा बना दिया। जल संरक्षण के इन प्रयासों से न केवल फसल चक्र मजबूत हुआ, बल्कि जलवायु परिवर्तन के प्रकोप से भी किसानों को निपटने की क्षमता मिली है। उप संचालक कृषि श्री राजीव श्रीवास्तव का कहना है कि आधुनिक तकनीक, बेहतर सिंचाई सुविधाओं और किसान प्रशिक्षण कार्यक्रमों का श्रेय इस सफलता को जाता है। उच्च गुणवत्ता वाले बीजों की यह उपलब्धता ने किसानों को न केवल उपज बढ़ाने में मदद की, बल्कि रोग प्रतिरोधी फसलों की खेती को भी प्रोत्साहित किया। बस्तर ब्लॉक के गुनपुर निवासी किसान नकुल भारती ने बताया कि पहले अच्छे बीज के लिए भटकना पड़ता था, अब आसानी से मिल रहे हैं। नवीन तकनीक से खेती करने के फलस्वरूप उत्पादन में भी अप्रत्याशित रूप से वृद्धि हुई है। अब किसानों का धान के साथ ही दलहन-तिलहन जैसी नकदी फसलों की ओर रूझान बढ़ रहा है।

छत्तीसगढ़ में किसानों के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी तो धान उत्पादन के बढे़ दामों में है। बस्तर भी अब ’’धान का कटोरा’’ बन रहा है और यहां के किसान अच्छी किस्म के धान का उत्पादन कर आर्थिक रूप से भी मजबूत हो रहे हैं। वर्ष 2000 में मोटे धान का समर्थन मूल्य 510 रुपये प्रति क्विंटल था, जो अब 3,100 रुपये तक पहुंच गया है। इसी तरह, ग्रेड-ए धान का दाम 540 से उछलकर 3,100 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। यह छह गुना से अधिक की वृद्धि किसानों की जेब में सीधे ताकत डाल रही है। राज्य सरकार की न्यूनतम समर्थन मूल्य की नीति और बाजार सुधारों ने इस बदलाव को संभव बनाया है। जगदलपुर ब्लॉक की कलचा निवासी महिला किसान जयंती बघेल ने गर्व से कहा, अब हम सिर्फ गुजारा नहीं कर रहे, बल्कि बच्चों की पढ़ाई और घर-परिवार की समुचित देखभाल कर रहे हैं।
यह 25 वर्ष की तरक्की का सफर बस्तर के मेहनतकश अन्नदाताओं की अथक परिश्रम के साथ ही कृषि एवं अन्य आनुशांगिक विभागों के अमले के योगदान का परिणाम भी है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की योजनाओं के साथ ही केन्द्र सरकार की योजनाओं के सहयोग से यह उपलब्धि हासिल हुई है। उप संचालक कृषि श्री राजीव श्रीवास्तव ने बताया कि हमारा लक्ष्य है कि बस्तर हरित क्रांति का प्रतीक बने। आने वाले वर्षों में मिलेट्स फसलों सहित दलहन-तिलहन फसलों को ज्यादा से ज्यादा प्रोत्साहित करना और जैविक खेती पर फोकस रहेगा।

*सिटी ब्यूरो जगदलपुर जय प्रकाश सिंह (मुनमुन सिंह)*

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