*दो बच्चियों की मौत पर शासन-प्रशासन की लापरवाही – बीजेपी का सुशासन सवालों के घेरे में*

मृतक के परिजनों को 10-10 लाख रुपए की मुआवजा राशि जारी करें सरकार- बुधराम नेताम
जिम्मेदार डॉक्टर एवं अधिकारीयों के विरुद्ध हो कानूनी कार्यवाही- झूमूकलाल दीवान
छत्तीसगढ़ आजतक, कोंडागांव 13 सितम्बर 2025
कोंडागांव – कोंडागांव जिले में हुई दो हृदयविदारक घटनाओं पर अपनी गहरी चिंता और आक्रोश व्यक्त करते हुए कोंडागांव जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा प्रेसवार्ता आयोजित कर उक्त घटनाओं को शासन प्रशासन की लापरवाही बताते कहा किग्राम पदेली का है जहाँ आंगनबाड़ी में पढ़ने वाली एक मासूम बच्ची महेश्वरी यादव उम्र 2.5 वर्ष की मौत हो गई। इस घटना के बाद शासन-प्रशासन ने सिर्फ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका को बर्खास्त करने तथा निरीक्षक को निलंबित करने की कार्रवाई की है। लेकिन कांग्रेस पार्टी का स्पष्ट कहना है कि यह कार्रवाई काफी नहीं है। यह कदम सिर्फ मामले को दबाने और ठंडा करने का प्रयास है, मामले मे उच्चधिकारीयों के विरुद्ध कार्यवाही होनी चाहिए।हमारी मांग है कि इस घटना में तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए, दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो और पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाए।मृतक के परिजनों को 10-10 लाख रुपए की मुआवजा राशि जारी करने की मांग बुधराम नेताम जिलाध्यक्ष कॉंग्रेस कमेटी द्वारा रखी गयी है।दूसरा मामला जिला अस्पताल का है जो की दिनों दिन बद से बदतर होते जा रही है,जहाँ इलाज के दौरान 7 वर्षीय बच्ची गंगा नेताम उम्र 7 वर्ष की मौत हो गई। यह सीधे-सीधे अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही है। सरकार की संवेदनहीनता और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का परिणाम है कि मासूमों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है।कांग्रेस पार्टी मांग करती है कि इस मामले में भी संबंधित जिम्मेदारों पर एफआईआर दर्ज हो,कड़ी कार्रवाई हो और पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाए।आंगनबाड़ी भवन निर्माण के बाद किस अधिकारी की लापरवाही है जिसके चलते खुले नंगे तार से बिजली खींची गयी थी और अब तक यह चल रही थी सभी विभाग के जिम्मेदार अधिकारी ज़ब क्षेत्र के दौरे मे जाते है तो क्या ऐसी लापरवाही उन्हें नजर नहीं आती क्या?जिम्मेदार डॉक्टर एवं अधिकारीयों के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही करने की मांग झूमूकलाल दीवान ने उठाई है।
*बीजेपी सरकार से सवाल*
यह किस तरह का सुशासन है जहाँ मासूम बच्चियों की मौत के बाद भी केवल औपचारिक कार्रवाई कर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश होती है?
क्या मासूम बच्चों की जान इतनी सस्ती है कि बर्खास्तगी और निलंबन से शासन अपने दायित्व से मुक्त हो जाएगा?
स्वास्थ्य और पोषण जैसी बुनियादी सुविधाओं में हो रही लापरवाही की जिम्मेदारी कौन लेगा?
क्या मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री इन घटनाओं की नैतिक जिम्मेदारी लेंगे?
*कांग्रेस की चेतावनी*
कांग्रेस पार्टी स्पष्ट करती है कि यदि दोनों मामलों में जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो हम सड़क से सदन तक आंदोलन करेंगे। मासूमों की मौत पर राजनीति नहीं, बल्कि न्याय चाहिए।हमारी लड़ाई पीड़ित परिवारों के हक और न्याय के लिए है।भाजपा सरकार बार-बार सुशासन और संवेदनशीलता का दावा करती है, लेकिन हकीकत यह है कि उनके राज में न तो आंगनबाड़ी सुरक्षित हैं, न ही अस्पताल।
कांग्रेस पार्टी दोनों पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है और हर स्तर पर न्याय दिलाने की लड़ाई लड़ेगी।
प्रेसवार्ता के दौरान जिलाध्यक्ष बुधराम नेताम, पूर्व जिलाध्यक्ष झूमूकलाल दीवान,जिला उपाध्यक्ष तरुण गोलछा,प्रभारी महामंत्री रितेश पटेल,नंदू दीवान, रविन्द्र दीवान, गीतेश बघेल, बुधराम मरकाम मौजूद रहें।



