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कोंडागांवछत्तीसगढ़ / मध्यप्रदेश

*बिवला गांव छोड़ने को बाध्य हो रहे आदिवासी परिवार के 06 सदस्य*

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2020 से प्रतिवर्श प्रताड़ित कर रहे गांव के कुछ ग्रामीण

*छत्तीसगढ़ आजतक,कोण्डागांव 11 जुलाई 2025*

01 जुलाई 2025 को पुलिस थाना कोण्ड़ागांव में प्रस्तुत
षिकायत ’’गंदी-गंदी गाली गलौज करके जान से मारने की धमकी देकर, बाड़ी व कृशि यंत्रों
को तोड़फोड़ करने तथा नलकूप में लगे विद्युत चलित मोटर पम्प को लूट कर ले जाने वालों
के विरुद्ध एफ.आई. आर.दर्ज करने के साथ ही सुरक्षा देने, विशयक षिकायत पर कार्यवाही
नहीं करने से व्यथित होकर। गांव में षांतिपुर्वक जीवनयापन करने नहीं देने के कारण, गांव
छोड़ने को मजबूर होने की दी जा रही सूचना पर हमारे परिवार में षामिल कुल 06 सदस्यों
के लिए जिला मुख्यालय कोण्डागांव में ही जीवनयापन की समुचित व्यवस्था करने विशयक एक
आवेदन जिला कलेक्टर कोण्डागांव को दिए जाने का मामला सामने आया है।
कलेक्टर को दिए गए आवेदन में लेख है कि मैं श्रीमती लछनी मरकाम पति धनीराम मरकाम 40 वर्श, जाति गोंड़, ग्राम बिवला तोयापारा, तहसील माकड़ी, जिला कोण्डागांव, की निवासी हूं। 01 जुलाई की सुबह उपरोक्त पते पर बिवला तोयापारा के कुछ ग्रामीणों के द्वारा हमारे घर बाड़ी में आकर गाली-गलौज करते हुए जान से मार देने की धमकी दी गई, हम डरकर घर से बाहर नहीं निकले। जिसपर उन्होंने बाड़ी में सिंचाई के लिए लगाए गए ड्रिप पाईप लाईन को तोड़ दिया, विद्युत लाईन कनेक्षन को तोड़ दिया। नलकूप से विद्युत मोटर को, बाड़ी में घेरा लगाए गए कटीला तार, लकड़ी के पोल आदि को लूटकर ले गए। जिसकी लिखित षिकायत हमारे द्वारा 01 जुलाई को पुलिस थाना में की गई। जहां हमसे कहा जा रहा है कि पहले यह सिद्ध करो कि नलकूप, बाड़ी आदि तुम्हारे पट्टे की जमीन पर है। इसके लिए सीमांकन कराओ। जिसपर हमने पुर्व में कराए गए सीमांकन रिपोर्ट दिखाया तो वे नहीं मान रहे हैं। पुलिस के व्यवहार से ज्ञात होता है कि हम आदिवासी झूठे हैं। अवगत कराना चाहते हैं कि पहली बार अपनी सम्पत्ति बचाने के प्रयास में 11 जून 2020 को ग्रामीणों के द्वारा हमारे परिवार में षामिल कुल 04 सदस्यों के साथ जमकर मारपीट किया गया और हमारी सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाया गया, पुलिस थाना कोण्डागांव में उसी दिन आकर रिपोर्ट लिखने के लिए लिखित आवेदन देने पर भी रिपोर्ट नहीं लिखा गया। एस.पी.कोण्डागांव को 10 जुलाई 2020 को लिखित में आवेदन देने के बाद भी जैसे-तैसे 03 माह बाद 10 अक्टूबर 2020 को एफ.आई.आर.दर्ज किया गया। इसी दौरान फिर से गांव वालों के द्वारा हमारे परिवार को जान से मारने की धमकी देने पर 04 नवम्बर 2020 को आवेदन दिया गया। लेकिन वहीं हम मार खाने वालों के विरुद्ध भी काउन्टर एफआईआर दर्ज किया गया। मामला वर्तमान में भी माननीय न्यायालय में विचाराधीन है। दुबारा 17 मार्च 2021 को भी मेरे एवं मेरे पति के साथ गाली गलौज मारपीट किए जाने पर पुलिस थाना कोण्डागांव में 17 मार्च 2021 को एफआईआर दर्ज कराया गया है। तीसरी बार पुनः हमारे पट्टे की जमीन में बने तालाब से मछली पकड़ने से मना किया तो गांव वालों द्वारा पुनः हमारे परिवार के लोगों के साथ गाली गलौज किया गया जिसपर पुलिस थाना कोण्डागांव में 08 मई 2022 को एफआईआर दर्ज कराया गया है। चौथी बार जमीन सम्बन्धी मामले में माननीय न्यायालय तहसीलदार माकड़ी के आदेष पर पुलिस अधिकारियों की मौजुदगी में हमारे घर बाड़ी में कब्जा दिलाने पहुंचे आर.आई. एवं हल्का पटवारी के साथ भी 19 अक्टूबर 2022 को ग्रामीणों के द्वारा मारपीट किया जा चुका है, जिसपर पुलिस थाना में एफआईआर दर्ज किया गया है। उक्त मामला भी माननीय न्यायालय में विचाराधीन है। पांचवी बार 25 जून 2023 को भी हमारे परिवार के सदस्यों के साथ गाली गलौज और मारपीट किया गया, जिसपर 25 जून 2023 को पुलिस थाना में एफआईआर दर्ज किया गया है। उक्त मामला भी माननीय न्यायालय में विचाराधीन है। छठवीं बार 01 जुलाई 2025 को पुनः हमारे परिवार के सदस्यों के साथ गाली-गलौज करके हमारी सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाया गया है और लिखित आवेदन पुलिस थाना कोण्डागांव देने पर एफआईआर दर्ज नहीं किया जा रहा है। उपरोक्त सभी मामलों में से अधिकांष मामलों में हम मारपीट गाली गलौज के पीड़ितों के विरुद्ध भी काउन्टर एफआईआर दर्ज हुआ है। उपरोक्त सभी मामलों को गौर से देखने पर यह ज्ञात होने पर कि पुलिस हम आदिवासी परिवार को झूठा और हमारे साथ मारपीट, गाली गलौज करने और हमारी सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले ग्रामीणों का सच्चा मान रही है। जिसके कारण ही कलेक्टर के समक्ष यह लिखित आवेदन पत्र देकर हम पीड़ित ’’गांव में षांतिपुर्वक जीवनयापन करने नहीं देने के कारण, गांव छोड़ने को मजबूर होने की सूचना देकर हमारे परिवार में षामिल कुल 06 सदस्यों के लिए जिला मुख्यालय कोण्डागांव में ही जीवनयापन की समुचित व्यवस्था करने का निवेदन करने को बाध्य हो रहे हैं। प्रतिलिपि देकर मामले को पुलिस अधीक्षक जिला कोण्डागांव को भी अवगत कराया गया है।
कलेक्टर से कार्यवाही किए जाने का आष्वासन मिलने के बाद पीड़ित परिवार के 06 सदस्य वापस अपने गांव तो चले गए हैं, लेकिन अब देखने वाली बात यह होगी कि जिला कलेक्टर एवं एस.पी. कोण्डागांव उपरोक्त गम्भीर मामले को कितनी गम्भीरता से लेते हैं, कब तक और क्या कार्यवाही करते हैं ?

Chhattisgarh Aaj Tak
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