*नक्सलियों ने शांति वार्ता की अटकलों को किया खारिज, हथियार डालने से साफ इनकार; बोले – “सशस्त्र संघर्ष जारी रहेगा”*

*छत्तीसगढ़ आजतक, बीजापुर 23 सितम्बर 2025*
शांति की उम्मीदों को बड़ा झटका देते हुए, नक्सलियों की केंद्रीय समिति और दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी ने सरकार के साथ किसी भी तरह की शांति वार्ता की संभावनाओं को सिरे से खारिज कर दिया है। सोमवार को जारी एक संयुक्त प्रेस नोट में, दोनों संगठनों ने स्पष्ट किया है कि वे हथियार नहीं छोड़ेंगे और न ही शांति प्रक्रिया में शामिल होंगे। यह बयान हाल ही में नक्सली नेता सोनू द्वारा शांति वार्ता की इच्छा जताने वाले पत्र के बाद आया है, जिसे अब संगठन ने उनका “व्यक्तिगत फैसला” करार दिया है।
नक्सली संगठनों का यह कड़ा रुख उस समय सामने आया है जब कुछ दिनों पहले पोलित ब्यूरो सदस्य सोनू द्वारा अभय के नाम से जारी एक पत्र ने हलचल मचा दी थी, जिसमें शांति वार्ता की पहल की बात कही गई थी। इस पर अपना रुख साफ करते हुए, केंद्रीय समिति के प्रवक्ता अभय और दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के प्रवक्ता विकल्प ने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा, “अभय के नाम से पोलित ब्यूरो सदस्य सोनू ने जो पत्र जारी किया था, वह सोनू का व्यक्तिगत फैसला है। केंद्रीय समिति का इससे कोई लेना-देना नहीं है।”
संगठन ने अपने तीन पन्नों के प्रेस नोट में इस बात पर जोर दिया है कि सशस्त्र संघर्ष को छोड़ना उनकी क्रांतिकारी पार्टी को एक संशोधनवादी पार्टी में बदलने जैसा होगा। उन्होंने पूर्व में बसवराजु द्वारा की गई शांति वार्ता की कोशिशों को भी गलत तरीके से पेश किए जाने का आरोप लगाया। नक्सलियों का मानना है कि इस तरह की शांति वार्ता की पेशकश संगठन के भीतर गहरे मतभेद और विभाजन का कारण बन सकती है।
इस संयुक्त बयान के माध्यम से नक्सलियों ने एक बार फिर शांति की किसी भी संभावना को नकारते हुए अपने सशस्त्र संघर्ष को जारी रखने के इरादे साफ कर दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि हथियार डालना और मुख्यधारा में शामिल होना उनकी नीति का हिस्सा नहीं है। इस घोषणा ने बस्तर समेत देश के अन्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षाबलों और सरकार की चिंता बढ़ा दी है, और यह संकेत दिया है कि आने वाले समय में संघर्ष और तेज हो सकता है



