Breaking
*प्रधान न्यायाधीश ने नेशनल लोक अदालत को अधिक प्रभावी बनाने हेतु बैंक विभाग, दूरसंचार व नगरपालिका के अधिकारीयों का लिया एक महत्वपूर्ण बैठक**सीबीएसई कक्षा 10वीं के मेधावी विद्यार्थियों का जिला कार्यालय में हुआ सम्मान**गुण्डाधुर कॉलेज का बड़ा कदम: जल परीक्षण लैब से हुआ MOU**पुलिस अधीक्षक श्री आकाश श्रीश्रीमाल ने प्रार्थियो को लौटाए लाखो के गुम मोबाईल।**विधायक सुश्री लता उसेण्डी की अध्यक्षता में जीवन दीप समिति की बैठक संपन्न**ग्राम माकड़ी में जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन**सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोण्डागांव के द्वारा किशोर न्याय बोर्ड का औचक किया निरीक्षण।* *तेंदूपत्ता संग्रहण वर्ष 2026 की कार्ययोजना पर समीक्षा बैठक एवं कार्यशाला आयोजित**संघर्ष के प्रतिक लाल झण्ड़ा लेकर सी.पी.आई. पहुंचा कोण्डागांव-माकड़ी ब्लॉक के गांवों में**महिला सहायता सेवाओं की समीक्षा हेतु सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोण्डागांव के द्वारा सखी वन स्टॉप सेंटर कोण्डागांव का किया गया निरीक्षण*

कोंडागांवक्राइमछत्तीसगढ़ / मध्यप्रदेश

*लाइसेंस के बदले 41 करोड़ की रिश्वत, हर महीने 200 ट्रक अवैध शराब खपाई*

*छत्तीसगढ़ आजतक, रायपुर 31 अगस्त 2025*

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 32 हजार करोड़ रुपये के शराब घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने बड़ा खुलासा किया है।

आरोप पत्र के अनुसार, ओम साईं बेवरेजेस प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर अतुल सिंह और मुकेश मनचंदा को सिंडिकेट के सरगना अनवर ढेबर और विकास अग्रवाल उर्फ सुब्बू की मदद से एफएल 10-ए लाइसेंस दिलाया गया। इसके जरिये 2020 से 2023 के बीच उन्हें लगभग 68 करोड़ रुपये का फायदा हुआ। इसमें से 41 करोड़ रुपये सिंडिकेट तक पहुंचाए गए, जबकि 27 करोड़ रुपये ओम साईं बेवरेजेस को मिले।

ईओडब्ल्यू का दावा है कि इस राशि का बड़ा हिस्सा पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के करीबी और जेल में बंद विजय भाटिया तक पहुंचाया गया। जांच एजेंसी अब ओम साईं समेत अन्य कंपनियों के वित्तीय लेन-देन और शराब आपूर्ति से जुड़े मामलों की पड़ताल कर रही है।

आरोप पत्र में कहा गया है कि ओम साईं बेवरेजेस, दिशिता वेंचर्स और नेक्सजेन पावर इंजीटेक कंपनियां घोटाले की अहम कड़ी थीं। शराब विनिर्माता कंपनियां पहले इन्हें शराब बेचती थीं। फिर 10% मार्जिन जोड़कर ये कंपनियां शराब को सरकारी दुकानों में बेचती थीं। इस अतिरिक्त मुनाफे का 60% सिंडिकेट और 40% लाइसेंसी कंपनियों में बांटा जाता था।

इसके अलावा, जांच में सामने आया कि सिंडिकेट ने बिना रिकॉर्ड करोड़ों की देशी शराब भी खपाई। डिस्टलरी संचालकों से अवैध उत्पादन कराया गया और बोतलों पर नकली होलोग्राम लगाकर सरकारी दुकानों से बिक्री कराई गई।

ईओडब्ल्यू के अनुसार, हर महीने 200 ट्रक शराब खपाई जाती थी। एक ट्रक में करीब 800 पेटियां होती थीं। इन्हें कम दाम पर खरीदकर एमआरपी से कई गुना ज्यादा पर बेचा जाता था। इस खेल में आबकारी विभाग, सीएसएमसीएल के तत्कालीन एमडी अरुणपति त्रिपाठी, डिस्टलरी संचालक और अन्य एजेंसियों की मिलीभगत सामने आई है।

Chhattisgarh Aaj Tak

Related Articles