WhatsApp Image 2026-08-11 at 5.04.01 PM
WhatsApp Image 2026-08-11 at 5.04.01 PM (1)
WhatsApp Image 2026-08-11 at 5.04.02 PM
WhatsApp Image 2026-08-11 at 5.04.02 PM (1)
WhatsApp Image 2026-08-11 at 5.04.02 PM (2)
WhatsApp Image 2026-08-11 at 5.04.03 PM
WhatsApp Image 2026-08-11 at 5.04.03 PM (1)
WhatsApp Image 2026-08-11 at 5.04.04 PM

Breaking
*आरएसएस के बारे में धूल झोंकने में एक बार फिर नाकाम रहे भागवत**अण्डर ट्रायल रिव्यू कमेटी, मॉनिटरिंग सेल एवं नेशनल लोक अदालत के संबंध में कोण्डागांव जिले के अधिकारियों का बैठक हुआ सम्पन्न।**राहुल गांधी का संसद मार्ग थाने का घेराव,पेलेट गन से घायल युवक की एफआईआर नहीं होने से 6घंटे तक दिया धरना**वंदेमातरम् राष्ट्रगीत है, राष्ट्रीयता की कसौटी नही**लाल किले का भाषण और फासीवादी एजेंडा की खुलती परतें**साइबर क्राइम के विरुद्ध छत्तीसगढ़ पुलिस का “साइबर जागृति अभियान”**मंदिर के चढ़ावे से विपक्षी सांसदों तक डाकेजनी!**एन एच एम में बड़ी कार्रवाई: वित्तीय अनियमितता मामले में डीपीएम, डीएएम और डीटीसी की संविदा सेवा समाप्त**यूनिसेफ प्रतिनिधिमंडल ने शंकरपुर में सामुदायिक पहल कार्यों का किया अवलोकन**शाला प्रवेश उत्सव में विद्यार्थियों एवं ग्रामीणों ने ली नशा मुक्ति की शपथ*

कोंडागांवक्राइमछत्तीसगढ़ / मध्यप्रदेश

*लाइसेंस के बदले 41 करोड़ की रिश्वत, हर महीने 200 ट्रक अवैध शराब खपाई*

WhatsApp Image 2026-08-11 at 5.04.04 PM
WhatsApp Image 2026-08-11 at 5.04.03 PM (1)
WhatsApp Image 2026-08-11 at 5.04.03 PM
WhatsApp Image 2026-08-11 at 5.04.02 PM (2)

*छत्तीसगढ़ आजतक, रायपुर 31 अगस्त 2025*

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 32 हजार करोड़ रुपये के शराब घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने बड़ा खुलासा किया है।

आरोप पत्र के अनुसार, ओम साईं बेवरेजेस प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर अतुल सिंह और मुकेश मनचंदा को सिंडिकेट के सरगना अनवर ढेबर और विकास अग्रवाल उर्फ सुब्बू की मदद से एफएल 10-ए लाइसेंस दिलाया गया। इसके जरिये 2020 से 2023 के बीच उन्हें लगभग 68 करोड़ रुपये का फायदा हुआ। इसमें से 41 करोड़ रुपये सिंडिकेट तक पहुंचाए गए, जबकि 27 करोड़ रुपये ओम साईं बेवरेजेस को मिले।

ईओडब्ल्यू का दावा है कि इस राशि का बड़ा हिस्सा पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के करीबी और जेल में बंद विजय भाटिया तक पहुंचाया गया। जांच एजेंसी अब ओम साईं समेत अन्य कंपनियों के वित्तीय लेन-देन और शराब आपूर्ति से जुड़े मामलों की पड़ताल कर रही है।

आरोप पत्र में कहा गया है कि ओम साईं बेवरेजेस, दिशिता वेंचर्स और नेक्सजेन पावर इंजीटेक कंपनियां घोटाले की अहम कड़ी थीं। शराब विनिर्माता कंपनियां पहले इन्हें शराब बेचती थीं। फिर 10% मार्जिन जोड़कर ये कंपनियां शराब को सरकारी दुकानों में बेचती थीं। इस अतिरिक्त मुनाफे का 60% सिंडिकेट और 40% लाइसेंसी कंपनियों में बांटा जाता था।

इसके अलावा, जांच में सामने आया कि सिंडिकेट ने बिना रिकॉर्ड करोड़ों की देशी शराब भी खपाई। डिस्टलरी संचालकों से अवैध उत्पादन कराया गया और बोतलों पर नकली होलोग्राम लगाकर सरकारी दुकानों से बिक्री कराई गई।

ईओडब्ल्यू के अनुसार, हर महीने 200 ट्रक शराब खपाई जाती थी। एक ट्रक में करीब 800 पेटियां होती थीं। इन्हें कम दाम पर खरीदकर एमआरपी से कई गुना ज्यादा पर बेचा जाता था। इस खेल में आबकारी विभाग, सीएसएमसीएल के तत्कालीन एमडी अरुणपति त्रिपाठी, डिस्टलरी संचालक और अन्य एजेंसियों की मिलीभगत सामने आई है।

Chhattisgarh Aaj Tak
WhatsApp Image 2026-08-11 at 5.04.01 PM
WhatsApp Image 2026-08-11 at 5.04.01 PM (1)
WhatsApp Image 2026-08-11 at 5.04.02 PM
WhatsApp Image 2026-08-11 at 5.04.02 PM (1)

Related Articles