*चित्रकोट जलप्रपात पर्यटन केंद्र में बवाल, लोहंडीगुड़ा एसडीएम ने नाका किया सील*
*छत्तीसगढ़ आजतक, जगदलपुर/बस्तर 20 मई 2025*
सोमवार को बस्तर के प्रसिद्ध जलप्रपात चित्रकोट पर्यटन केंद्र में जमकर हंगामा हुआ. दरअसल लोहंडीगुड़ा एसडीएम नीतीश वर्मा ने चित्रकोट समिति द्वारा संचालित नाके को अवैध बताते हुए सील कर दिया. नाके को सील किए जाने से नाराज चित्रकोट समिति के लोगों ने जोरदार प्रदर्शन और हंगामा किया. समिति के लोगों ने मारडूम चौक से जाने वाले चित्रकोट मार्ग को जाम कर दिया. धरने पर बैठे लोगों ने प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया.
*नाके को सील करने पर फूटा समिति का गुस्सा:* करीब पांच घंटे तक चित्रकोट समिति के लोग सड़कों जाम कर प्रदर्शन करते रहे. प्रदर्शन और हंगामे की वजह से चित्रकोट जाने वाले पर्यटक काफी देर तक सड़कों पर फंसे रहे. मौके पर लोहंडीगुड़ा एसडीएम नीतीश वर्मा, तहसीलदार कैलाश पोयम, एसडीओपी ईश्वर त्रिवेदी, लोहंडीगुड़ा थाना प्रभारी रवि कुमार बैगा प्रदर्शन कर रहे लोगों को काफी देर तक मनाते रहे. लेकिन बात नहीं बनी. जिसके बाद एसडीएम के आदेश पर सख्ती दिखाते पुलिस को बल प्रयोग कर सड़क से हटाने का आदेश दिया. जिसके बाद पुलिस कर्मियों ने देखते ही देखते महज कुछ मिनट में ही प्रदर्शनकारियों को सड़क से हटा कर लोहंडीगुड़ा थाने पहुंचा दिया.
*लोहंडीगुड़ा एसडीएम ने नाका किया सील चित्रकोट समिति की दलील:* गांव के सरपंच भंवर मौर्य का कहना है कि मार्च महीने में ही ग्राम सभा कर नई समिति को नाके की जिम्मेदारी दी गई थी. जबकि पुरानी समिति द्वारा जमकर भ्रष्टाचार किया गया. पुरानी समिति पर कोई कार्यवाही न करते हुए नई समिति के काम पर प्रतिबंध लगाने का काम किया गया. गांव के सरपंच भंवर मौर्य ने लोहंडीगुड़ा एसडीएम के मेहमानों के लिए उचित व्यवस्था समिति द्वारा नहीं किए जाने के चलते यह कार्यवाही करने का आरोप लगाया.
*नाके का संचालन गलत तरीके से किया जा रहा था: नीतीश वर्मा, एसडीएम, लोहंडीगुड़ा*
नई समिति को नाके की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. पुरानी समिति ने तो इसमें भ्रष्टाचार किया था. पुरानी समिति पर कार्रवाई करने के बजाए नाके को सील कर दिया ये ठीक नहीं है: भंवर मौर्य, सरपंच, चित्रकोट
एसडीएम नीतीश वर्मा ने कहा:- पर्यटन स्थल में नाके का संचालन गैर कानूनी तरीके से किया जा रहा था. इसको लेकर उनके पास शिकायत की गई थी. इसको लेकर वर्तमान समिति को उन्होंने सूचना भी दी. समिति पंजीकृत भी नहीं थी. कथित तौर पर जिस ग्रामसभा में नई समिति को नाका संचालन का आदेश दिया गया. उस ग्राम सभा में महज 25 लोगों के ही दस्तखत है. इनमें से अधिकतर समिति संचालक है.



