अहंकार,अकड़पन और चापलूसों ने डुबोई मोहन मरकाम की नैया
19000 से करारी हार
कोंडागांव—-छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2023 प्रथम चरण में बस्तर संभाग में 12 सीटों के मतदान के बाद आज सभी सीटों के परिणाम आ चुके है।कोंडागांव विधानसभा 83 को हॉट सीट के रूप में देखा गया,यहां से प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष, व मंत्री मोहन मरकाम का सीधा मुकाबला पूर्व मंत्री व भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष लता उसेंडी से था।आज चुनाव के परिणामस्वरूप कांग्रेस प्रत्यासी मोहन मरकाम को हार का स्वाद चखने पर मजबूर होना पड़ा।विधानसभा क्षेत्र के लोगों का मानना है,कि मोहन मरकाम जब से अध्यक्ष बने थे,तब से हवा में उड़ने लगे थे,कार्यकर्ताओं से संवाद खत्म हो चुका था,लोगो के फोन उठाना बंद कर दिया था सिर्फ चापलूसों और गुलामी पसंद लोगो का उनके आसपास जमावडा बना रहा।मोहन मरकाम की कार्यशैली से क्षेत्र की जनता में काफी आक्रोश देखा गया।यहाँ चर्चा यह भी है कि 2008 व 2013 जिन लोगों ने मोहन मरकाम की पहचान बनाई, उन्हें कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में टिकट दिलाई,जीत दिलाई उनके विरुद्ध षड्यंत्र रचा,उनसे दूरिया बनाना भी एक बहुत बड़ा कारण रहा है।2023 के चुनाव में मोहन मरकाम के अलावा अन्य 12 लोगो ने भी अपनी दावेदारी की थी,वे सभी कांग्रेस के निष्ठावान व कर्मठ कार्यकर्ता रहे ,उन्होंने दावेदारी क्यों कि इससे उन्हें भी मरकाम की नाराजी का सामना करना पड़ा,उनके ऊपर मरकाम ने विश्वास नहीं किया उनसे मतभेद उत्पन्न कर लिए थे।जिन लोगो ने विपरीत परिस्थितियों साथ दिया जिसमें मनीष श्रीवास्तव, शिशिर श्रीवास्तव व सुरेश पाटले प्रमुख रूप से अग्रणी रहे,2023 के चुनाव में तीनों लोगों से चुनाव प्रचार के लिए बात तक नही करी ना ही उन्हें तवज्जों दी गई,मजबूरी में तीनों ने श्री दीपक बैज अध्यक्ष पीसीसी से आग्रह किया कि उनकी व उनके साथियों को दंतेवाडा विधानसभा में प्रचार हेतु ड्यूटी लगाई जाए,अपने साथियों के साथ तीनो ने दंतेवाडा जाकर छबीन्द्र कर्मा के पक्ष में प्रचार किया,अपने दायित्वों का निर्वहन किया।मनीष श्रीवास्तव व टीम की अनुपस्थिति मोहन मरकाम की हार का सबब बना,कोंडागांव के जन मानस का मानना है, कि जो लोग अभी-अभी भाजपा से कांग्रेस में आये उन दलबदलुओं को शहर की प्रमुख जिम्मेदारी दी गई,जिनमे वोट दिलाने की कूबत नही उन्हें शहर की जिम्मेदारी दी गई यह भी शहर में बडा गड्ढा होने का कारण बना।10 वर्षो की लोगो नकारात्मक छबि,एक बड़ा कारण बताया गया,अधिकारी व कर्मचारियों के प्रति उदासीनता उनकी नकारात्मक दृष्टिकोण को दर्षाता है।07 नवम्बर के बाद गलत तरीके से तीनो लोगों मनीष श्रीवास्तव, शिशिर श्रीवास्तव व सुरेश पाटले को निष्कासन की मार मोहन मरकाम के अहंकार,अकड़बाजी ,अदूरदर्शिता, इर्दगिर्द पड़े चापलूसों के चलते झेलनी पड़ी।नगरपालिका चुनाव में टिकट वितरण हो,जिला पंचायत चुनाव में प्रत्यासी चयन हो या जनपद पंचायत चुनाव में हो इनकी अदूरदर्शिता के चकलते हार का सामना करना पड़ा।
2003 से 2018 तक प्रदेश में भाजपा की सरकार रही,इन 15 वर्षो में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने बहुत सी तकलीफें उठाई,झूठे प्रकरणों में जेल भी जाना पड़ा,बावजूद इसके 15 वर्षो तक कांग्रेस की एक जुटता, एकता और संघर्ष पूरे प्रदेश में दिखाई देता था,किन्तु कांग्रेस सरकार आने के बाद मोहन मरकाम के पीसीसी अध्यक्ष बनते ही पूरी एकता और एकजुटता बिखरती नजर आई,जिसका परिणाम 2023 के विधानसभा चुनाव में दिखाई पड़ रहा है।
वहीँ भाजपा के दावेदारों ने एक जुट होकर चुनाव लड़ा,जबकि कांग्रेस में दावेदारों का तिरस्कार किया गया,उन्हें साथ लेकर चलने की जहमत नही उठाई गई,जिसका परिणाम आज मोहन मरकाम को उठाना पड़ रहा है।



