*सुरक्षा के साथ-साथ शिक्षा को मिली प्राथमिकता ‘नियद नेल्लानार’ अभियान से बदल रही है अंदरूनी इलाकों की तस्वीर*

*छत्तीसगढ़ आजतक, बीजापुर , 20 जनवरी 2026*
‘नियद नेल्लानार’ अभियान के तहत जिला प्रशासन द्वारा अंडरूनी एवं संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा के साथ-साथ शिक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चों का भविष्य बंदूक की छाया में नहीं, बल्कि किताबों की रोशनी में गढ़ा जाए।
जहां कभी शिक्षकों का पहुंचना भी जोखिम भरा माना जाता था, आज वहां नियमित रूप से कक्षाएं संचालित हो रही हैं और बच्चों की उपस्थिति में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। यह क्षेत्र में शिक्षा के प्रति बढ़ते भरोसे और जागरूकता को दर्शाता है।
पूजा-अर्चना के साथ पक्के स्कूल भवन का शुभारंभ
पहली बार पक्के स्कूल भवन का शुभारंभ विधिवत पूजा-अर्चना के साथ किया गया। ग्रामीणों ने इसे केवल ईंट-पत्थर का निर्माण नहीं, बल्कि नक्सली आतंक से मुक्त भविष्य की नींव बताया। ग्रामीणों का कहना है कि अब उनके बच्चे भय के वातावरण में नहीं, बल्कि विश्वास और सुरक्षा के माहौल में शिक्षा ग्रहण करेंगे।
‘नियद नेल्लानार’ अभियान के अंतर्गत अंडरूनी नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और संचार जैसी बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है।
नक्सल प्रभावित क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से जुड़ा
उसूर विकासखंड के अति अंडरूनी गांव जीड़पल्ली में निर्मित यह विद्यालय भवन इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि यह इलाका अब नक्सली आतंक, असुरक्षा और भय से बाहर निकलकर शांति और विकास की नई कहानी लिख रहा है।
वर्षों तक गोलियों और धमाकों के डर के साए में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित रही, लेकिन आज उसी धरती पर पक्के स्कूल भवन से बच्चों की ‘क, ख, ग’ की गूंज सुनाई दे रही है। करीब दो दशकों तक नक्सली हिंसा और दुर्गमता के कारण शिक्षा से वंचित रहे इस क्षेत्र में प्राथमिक शिक्षा का पुनः संचालन और नए विद्यालय भवन का निर्माण विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक मोड़ माना जा रहा है।
जहां पहले झोपड़ी में अस्थायी स्कूल संचालित होता था, वहीं अब एक सुरक्षित, सुव्यवस्थित और स्थायी शैक्षणिक परिसर खड़ा है, जो आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद बन चुका है।



