*बीजापुर में 34 इनामी माओवादी मुख्यधारा में लौटे, कुल 84 लाख का था इनाम*

*छत्तीसगढ़ आजतक, बीजपुर 16 दिसम्बर 2025*
बीजापुर (छत्तीसगढ़)। राज्य शासन की पुनर्वास एवं आत्मसमर्पण नीति तथा “पूना मारगेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन” अभियान के सकारात्मक प्रभाव के चलते बीजापुर जिले में 34 माओवादी कैडरों ने हिंसा का रास्ता छोड़ते हुए समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है। इन पर कुल 84 लाख रुपये का इनाम घोषित था। आत्मसमर्पण करने वालों में 7 महिला एवं 27 पुरुष माओवादी शामिल हैं।
आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी दक्षिण सब जोनल ब्यूरो (DKSZC) के अलावा तेलंगाना स्टेट कमेटी एवं एओबी डिवीजन से जुड़े हुए थे। इनमें डीवीसीएम, एसीएम, पीएलजीए सदस्य, मिलिशिया प्लाटून कमांडर, पार्टी सदस्य तथा जनताना सरकार से जुड़े पदाधिकारी शामिल हैं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार 1 जनवरी 2024 से अब तक बीजापुर जिले में 824 माओवादी मुख्यधारा में लौट चुके हैं, 1079 माओवादी गिरफ्तार किए गए हैं, जबकि 220 माओवादी अलग-अलग मुठभेड़ों में मारे गए हैं। यह आंकड़े जिले में माओवादी उन्मूलन अभियान की सफलता को दर्शाते हैं।
यह आत्मसमर्पण पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज, केरिपु सेक्टर रायपुर, दंतेवाड़ा रेंज के मार्गदर्शन तथा पुलिस अधीक्षक बीजापुर डॉ. जितेंद्र कुमार यादव के निर्देशन में चलाए जा रहे संयुक्त अभियान का परिणाम है। डीआरजी, बस्तर फाइटर, एसटीएफ, कोबरा एवं केरिपु बलों की सक्रिय भूमिका रही।
मुख्यधारा में लौटे माओवादी कैडरों ने भारतीय संविधान में आस्था व्यक्त करते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत सम्मानजनक जीवन जीने का संकल्प लिया है। पुनर्वास प्रक्रिया के अंतर्गत प्रत्येक कैडर को 50 हजार रुपये की तात्कालिक आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी, साथ ही शासन की पुनर्वास योजना के तहत अन्य सुविधाएं भी दी जाएंगी।
बीजापुर पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेंद्र कुमार यादव ने अपील करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति माओवादियों को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित कर रही है। उन्होंने कहा कि माओवादी भ्रामक और हिंसक विचारधारा को त्यागकर निडर होकर समाज से जुड़ें, शासन की ‘पूना मारगेम’ नीति उन्हें सुरक्षित और स्वावलंबी भविष्य प्रदान करती है।
सुरक्षा बलों एवं प्रशासन के समन्वित प्रयासों से दक्षिण बस्तर क्षेत्र में शांति, संवाद और विकास की दिशा में मजबूत नींव रखी जा रही है



