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कोंडागांवछत्तीसगढ़ / मध्यप्रदेश

*बस्तर में पेयजल प्रबंधन-25 वर्षों की विकास यात्रा में हर घर जल का सपना हो रहा साकार*

*छत्तीसगढ़ आजतक,जगदलपुर, 10 नवम्बर 2025*

छत्तीसगढ़ के घने वनों से आच्छादित आदिवासी बहुल इलाके बस्तर में पेयजल व्यवस्था हेतु किए जा रहे पहल के फलस्वरूप अब ग्रामीण अंचलों में पेयजल प्रबंधन में जनसहभागिता सुनिश्चित हो रही है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा जल जीवन मिशन और हर घर जल जैसी योजनाओं के तहत हजारों हैंडपंप, नल कनेक्शन और सोलर पंप स्थापित किए गए हैं, जिससे हर घर में सुरक्षित पेयजल पहुंच रहा है। यह उपलब्धि न केवल पेयजल की दिक्कतों से मुक्ति दिला रही है, बल्कि स्वास्थ्य और विकास की नई कहानी लिख रही है।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की इस पहल की शुरुआत कम आबादी वाले गांवों से हुई, जहां हैंडपंप पेयजल का मुख्य स्रोत बने। बस्तर जिले के कुल 614 ग्रामों में 5,106 बसाहटें हैं, और यहां 13,928 हैंडपंप स्थापित किए गए हैं। इन हैंडपंपों ने ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की आपूर्ति को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मूलभूत सिद्धांतों के तहत पेयजल योजनाओं का सावधानीपूर्वक क्रियान्वयन और रखरखाव सुनिश्चित किया जा रहा है ताकि पानी की बर्बादी रोकी जा सके और स्रोतों का संरक्षण हो सके।
नल जल प्रदाय योजना ने शहरी सुविधाओं को गांवों तक पहुंचाया। जिले में 140 नलजल योजनाएं क्रियान्वित की गई हैं, जो प्रति व्यक्ति प्रति दिवस 55 लीटर पेयजल उपलब्ध कराती हैं। इससे ग्रामीणों को साफ पानी की आसान पहुंच मिली है। वहीं जल जीवन मिशन द्वारा बस्तर को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। जिले के 614 ग्रामों में 630 योजनाओं का क्रियान्वयन कर कुल 1,71,885 परिवारों को नल कनेक्शन दिया जाना है और 543 उच्च क्षमता के जलागारों का निर्माण प्रस्तावित है। जिले में अब तक 306 उच्च क्षमता के जलागार निर्मित किये जा चुके हैं और कुल 79,390 घरों में नल कनेक्शन प्रदाय कर जलापूर्ति किया जा रहा हैं। यह मिशन न केवल पानी पहुंचा रहा है, बल्कि समुदाय को जल संरक्षण के लिए जागरूक भी कर रहा है। जिससे स्थानीय समुदाय भी इस मुहिम में शामिल होकर सक्रिय सहभागिता निभा रहा है।
सौर ऊर्जा पर आधारित योजनाएं इस क्रांति का एक और नवीन पहलू है। सोलर आधारित योजना के अंतर्गत 718 सोलर ड्यूल पंप स्थापित किए गए। जल जीवन मिशन के तहत 992 नए सोलर पंप प्रस्तावित हैं, जिनमें से 828 पहले ही स्थापित हो चुके हैं और 164 प्रगति पर हैं। कुल 60 सोलर आधारित योजनाओं का क्रियान्वयन हो रहा है, जो पर्यावरण अनुकूल और विश्वसनीय पेयजल स्रोत प्रदान कर रही हैं।
जल की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देते हुए विभाग ने मूलभूत दायित्वों को निभाया है। प्रत्येक घर में पेयजल उपलब्ध कराना, ग्रामीण क्षेत्रों में हैंडपंप स्थापित करना और पानी की जांच सुनिश्चित करना इनमें शामिल है। जिले में जिला जल परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित है, जहां 11 पैरामीटरों पर जल गुणवत्ता की जांच की जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में फील्ड टेस्टिंग किट के माध्यम से प्रशिक्षित जल बंधु द्वारा नियमित जांच की जा रही है, ताकि पानी की शुद्धता बनी रहे। मूलभूत अधिकारों के तहत, प्रत्येक नागरिक को पेयजल प्राप्ति का अधिकार है, और लोगों को पानी की आवश्यकता को पूरा करने के लिए सावधान रहने की अपील की गई है।
यह 25 वर्षीय यात्रा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विजन हर घर जल को साकार कर रही है। विभाग के अधिकारियों के अनुसार ये योजनाएं न केवल जल संकट हल कर रही हैं, बल्कि आदिवासी समुदायों को सशक्त बना रही हैं। बस्तर जैसे चुनौतीपूर्ण इलाके में यह सफलता अन्य जिलों के लिए प्रेरणा है। आने वाले वर्षों में और अधिक सोलर पंप और नल कनेक्शन जोड़कर, जिला पूर्ण रूप से पेयजल आपूर्ति के लिए सशक्त बनेगा। यह कहानी पानी की बूंदों से जीवन की नई धारा बहाने की है बस्तर अब सूखे की छाया से मुक्त होकर विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।

*सिटी ब्यूरो जगदलपुर जय प्रकाश सिंह ( मुनमुन सिंह)*

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